हिमाचल प्रदेश। अब हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्य और केंद्रीय उपक्रम भी बिजली उत्पादन कर सकेंगे। पिछले कई वर्षों से 20 परियोजनाओं के लिए आवंटन नहीं हो पा रहा था, जिसे लेकर सरकार ने नियमों में संशोधन किया है।
ऊर्जा निदेशालय ने 308 मेगावाट क्षमता वाली इन 20 बिजली परियोजनाओं के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब अन्य राज्यों और केंद्रीय उपक्रमों को 10 लाख प्रति मेगावाट के अपफ्रंट प्रीमियम पर इन परियोजनाओं का आवंटन किया जाएगा। इन परियोजनाओं को 40 साल के लिए आवंटित किया जाएगा, और अवधि खत्म होने के बाद इन पर सरकार का पूरा नियंत्रण होगा।
5.8 मेगावाट से लेकर 63.6 मेगावाट तक की इन परियोजनाओं को कुल्लू, चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला जिलों में चिह्नित किया गया है। यह परियोजनाएं चिनाव, सतलुज, रावी और ब्यास नदी बेसिन के क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी। इस पहल के तहत, प्रदेश सरकार ने पहली बार बाहरी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय उपक्रमों को इन परियोजनाओं का आवंटन 10 लाख प्रति मेगावाट अपफ्रंट प्रीमियम के आधार पर 40 साल के लिए करने का निर्णय लिया है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में सभी राज्यों के ऊर्जा सचिवों और केंद्रीय उपक्रमों को पत्र भेजा गया है। इसके अलावा, इन परियोजनाओं के आवंटन के लिए अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के स्थापित होने से बिजली आपूर्ति में वृद्धि होगी, मुफ्त बिजली के रूप में राजस्व में इजाफा होगा, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और स्थानीय क्षेत्रों का विकास होगा। अधिकारियों का कहना है कि छोटे निवेशक इन परियोजनाओं में निवेश नहीं कर रहे हैं, इसलिए अब अन्य राज्यों और केंद्रीय उपक्रमों को इन परियोजनाओं में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। बिजली परियोजनाओं के लिए निवेशकों को सिंगल विंडो प्रणाली के तहत सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।