कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड बोट अगले सप्ताह अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस IPO के जरिए लगभग 2,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखे हुए है।
कंपनी के सूत्रों ने बिजनेस टुडे टीवी को बताया कि बोट को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही तक सेबी से IPO के लिए मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि, IPO का सटीक आकार केवल DRHP में ही निर्धारित किया जाएगा, लेकिन सूत्रों का अनुमान है कि कुल आकार 2,000 करोड़ रुपए हो सकता है।
इस इश्यू में लगभग 500 करोड़ रुपए के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि बाकी 1,500 करोड़ रुपए के शेयर मौजूदा शेयरहोल्डर्स ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे। पिछले साल नवंबर में बोट ने IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज, गोल्डमैन सैक्स और नोमुरा सहित कई प्रमुख बैंकरों को नियुक्त किया था।

कंपनी 2 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर IPO लाना चाहती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोट लगभग 2 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर IPO लाने की योजना बना रहा है, हालांकि अंतिम आंकड़े अभी तय नहीं हुए हैं। यह बोट का IPO लाने का दूसरा प्रयास होगा।
2022 में किया गया था IPO का प्रयास।
इससे पहले, बोट ने 2022 में 2,000 करोड़ रुपए के IPO के लिए आवेदन किया था, लेकिन उस समय बाजार की स्थितियां अनुकूल नहीं थीं, जिसके चलते कंपनी ने अपनी एप्लीकेशन वापस ले ली थी। इसके बाद बोट ने लिस्टिंग के बजाय प्राइवेट फंडिंग के जरिए 60 मिलियन डॉलर (लगभग 520 करोड़ रुपए) जुटाने का निर्णय लिया था।
बोट का मार्केट में प्रभाव और निवेशक समर्थन।
2024 तक, बोट ने भारत के वियरेबल मार्केट में 26.7% की हिस्सेदारी हासिल की है। 2013 में स्थापित इस कंपनी ने 2014 में अपना प्रमुख ब्रांड लॉन्च किया और अब यह भारत की प्रमुख वियरेबल और ऑडियो डिवाइस निर्माता कंपनियों में से एक बन गई है।

क्वालकॉम वेंचर्स, इनोवेन कैपिटल, वारबर्ग पिंकस और फायरसाइड वेंचर्स जैसे प्रमुख निवेशक बोट का समर्थन करते हैं। इन निवेशकों और मजबूत मार्केट प्रेजेंस की वजह से बोट के IPO को संस्थागत और खुदरा निवेशकों से अच्छा रिस्पांस मिल सकता है।
DRHP फाइलिंग से बोट को मिलने वाली सुविधा।
DRHP फाइल करने से बोट को अपनी वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन विवरण को सार्वजनिक करने से पहले फाइनलाइज करने की अनुमति मिल जाएगी। यह कदम कंपनियों के लिए जरूरी होता है, जो बाजार समय और नियामकीय अनुमतियों के अनुसार अपनी योजनाओं को आकार देती हैं।