सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट के मामले में हाईकोर्ट सख्त, LPU-चितकारा यूनिवर्सिटी से जुड़ी 3 पोस्ट अब भी मौजूद

चंडीगढ़/फगवाड़ा: सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक सामग्री साझा करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) और चितकारा यूनिवर्सिटी से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर अलग-अलग विचार रखना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन कथित झूठे तथ्यों के जरिए समाज में अशांति फैलाने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भ्रामक सामग्री फैलाने के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामले में याचिकाकर्ता ने बताया कि 12 अक्टूबर के आदेश के बाद सोशल मीडिया से ज्यादातर पोस्ट हटा दी गई हैं, लेकिन X, इंस्टाग्राम और रेडिट पर तीन पोस्ट अब भी उपलब्ध हैं।

याचिकाकर्ता ने इन पोस्ट के प्रिंटआउट अदालत में पेश करते हुए राज्य सरकार से इन्हें हटाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने की मांग की। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर के लिए निर्धारित की है।

सरकारी एजेंसियों की सक्रियता पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से मामले को गंभीरता से लेने को कहा। बेंच ने टिप्पणी की कि यदि सीमित संसाधनों के बावजूद याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री खोज सकता है, तो सरकारी एजेंसियों से भी सक्रियता की अपेक्षा की जाती है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले को सरकार और याचिकाकर्ता के बीच टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक गंभीर जनहित का मुद्दा है, जिस पर उपलब्ध तथ्यों और सामग्री के आधार पर विचार करना जरूरी है।

कोर्ट के सामने पेश की गई कुछ सामग्री की प्रकृति पर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने कहा कि ऐसी सामग्री को केवल समाचार रिपोर्टिंग बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। उसकी वास्तविक प्रकृति और प्रभाव की जांच आवश्यक है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने पोस्ट हटाने की जानकारी दी

सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से पेश वकील ने बताया कि नोटिस और अदालत के आदेशों के अनुपालन में पहचानी गई आपत्तिजनक पोस्ट तक पहुंच रोक दी गई है। इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का आश्वासन भी दिया गया।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि X, इंस्टाग्राम और रेडिट पर तीन पोस्ट अभी भी उपलब्ध हैं। इसके बाद अदालत ने संबंधित पक्षों को सामग्री की दोबारा समीक्षा करने और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

अदालत ने यह जानकारी देने को कहा कि किन पोस्ट पर कार्रवाई की गई है और क्या कोई कथित भ्रामक सामग्री अब भी सोशल मीडिया पर मौजूद है।

IT एक्ट के अनुपालन पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम यानी IT Act के प्रावधानों के अनुपालन का मुद्दा भी उठा। अदालत ने संबंधित पक्षों से अपना रुख स्पष्ट करने और उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामों के माध्यम से पेश करने को कहा।

अगली सुनवाई में सोशल मीडिया पोस्ट की उपलब्धता, उन्हें हटाने के लिए किए गए प्रयासों और संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

राजनीतिक आरोपों से आगे मामले को देख रहा है कोर्ट

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुनवाई को विश्वविद्यालयों से जुड़े राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अदालत का मुख्य ध्यान रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की कानूनी जिम्मेदारियों पर है।

अब इस मामले में 4 नवंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। उस दिन संबंधित पक्षों के हलफनामों और पोस्ट पर की गई कार्रवाई की जानकारी के आधार पर आगे की स्थिति सामने आ सकती है।

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