पंजाबी दूरदर्शन डेस्क | नई दिल्ली
77वें गणतंत्र दिवस की भव्य परेड में पंजाब की झांकी ने देशवासियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस वर्ष पंजाब की झांकी सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को समर्पित रही, जिन्हें ‘हिंद की चादर’ के रूप में जाना जाता है।
पंजाब की इस सुंदर और भावनात्मक झांकी के माध्यम से सिख धर्म के मूल संदेश—मानवता, दया, सच्चाई और बलिदान—को अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। झांकी के अग्रभाग में ‘एक ओंकार’ का प्रतीक दर्शाया गया, जो यह संदेश देता है कि ईश्वर एक है। इसके साथ ही हाथ का प्रतीक शामिल किया गया, जो मानवता, करुणा और एक-दूसरे की सहायता की भावना को दर्शाता है।
झांकी में रागी सिंहों द्वारा शब्द कीर्तन की झलक दिखाई गई, जिसने आध्यात्मिक वातावरण को और भी प्रभावशाली बना दिया। इसके अलावा खंडा साहिब का प्रतीक सिख परंपरा और साहस का प्रतिनिधित्व करता नजर आया। झांकी में गुरुद्वारा श्री शीश गंज साहिब को भी दर्शाया गया, जो श्री गुरु तेग बहादुर जी का ऐतिहासिक शहादत स्थल है।
इस दौरान भाई मती दास और भाई दयाला की शहादत को भी झांकी के माध्यम से चित्रित किया गया, जिन्होंने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
गणतंत्र दिवस 2026 की थीम ‘वंदे मातरम्’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अनुरूप पंजाब की यह झांकी देश की एकता, सांस्कृतिक विविधता और पंजाब के गौरवशाली इतिहास को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती नजर आई।

