अमृतसर:
अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में सेवा निभाने वाले सेवादारों की वर्दी में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य परंपरा, अनुशासन और धार्मिक गरिमा को और सुदृढ़ करना बताया गया है। नई व्यवस्था के तहत पहली बार सेवादारों के लिए दो रंगों—गहरा नीला और पीला—की वर्दी लागू की गई है।
नई वर्दी के साथ सेवादारों के कंधों पर खंडे की नक्काशी की गई है, जबकि सभी सेवादार सफेद रंग का हजूरिया धारण करेंगे। यह बदलाव तीन दिन पहले आंतरिक रूप से लागू किया गया था, जिसे अब औपचारिक रूप से प्रभावी कर दिया गया है।
SGPC का फैसला
सेवादारों की वर्दी में यह परिवर्तन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के निर्णय के तहत किया गया है। इससे पहले भी समय-समय पर वर्दी में बदलाव होते रहे हैं।
- 1960–70 के दशक में पारंपरिक वेशभूषा
- 1990 में नीली वर्दी और पहचान चिन्ह
- 2000 में कंधों/सीने पर पहचान
- 2015 के बाद मुख्य रूप से नीली वर्दी
अब एक बार फिर परंपरा और आधुनिक पहचान का संतुलन बनाते हुए नया स्वरूप अपनाया गया है।
कैसी होगी नई वर्दी
नई व्यवस्था के अनुसार—
- सेवादार सप्ताह में बारी-बारी से दो-दो दिन नीली और पीली वर्दी पहनेंगे
- जब पीली वर्दी होगी, तब पगड़ी नीले रंग की होगी
- जब नीली वर्दी होगी, तब पगड़ी पीले रंग की रहेगी
- सीने पर “गोल्डन टेंपल, श्री अमृतसर” स्पष्ट रूप से अंकित होगा
- कमरकस्से के लिए विशेष बेल्ट और पगड़ी पर सजाने के लिए खंडा दिया गया है
यह व्यवस्था सेवादारों की एकरूपता और पहचान को और मजबूत करेगी।
सेवादारों की छवि और गरिमा बढ़ेगी
श्री दरबार साहिब के मैनेजर राजिंदर सिंह रूबी ने बताया कि वर्दी में यह बदलाव पूरी सोच-विचार के बाद किया गया है। उन्होंने कहा कि नई वर्दी से सेवादारों की पहचान और अधिक स्पष्ट होगी, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और सेवा व्यवस्था और बेहतर होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव सेवादारों की मर्यादा, गरिमा और प्रभावशाली उपस्थिति को और निखारेगा।

