‘बैंड’ वाले बयान पर पंजाब की राजनीति गरमाई: फाइनेंस मंत्री चीमा का अल्टीमेटम, बाजवा 24 घंटे में माफी मांगें

चंडीगढ़:
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा के एक बयान को लेकर पंजाब की सियासत में तीखा घमासान शुरू हो गया है। बाजवा द्वारा कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ को लेकर की गई टिप्पणी पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बयान को आपत्तिजनक बताते हुए बाजवा को 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय में माफी नहीं मांगने की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘मेहनत से यहां तक पहुंचे हैं ईटीओ’

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि हरभजन सिंह ईटीओ ने संघर्ष और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बताया कि ईटीओ ने सिविल सर्विस परीक्षा पास की, प्रशासनिक सेवा में रहते हुए ईमानदारी से काम किया और बाद में समाजसेवा के उद्देश्य से नौकरी छोड़कर राजनीति में आए।

चीमा ने कहा कि किसी के पारिवारिक पेशे या सामाजिक पृष्ठभूमि को निशाना बनाना न सिर्फ गलत है, बल्कि समाज को बांटने वाला कृत्य है।

दलित समाज के अपमान का आरोप

फाइनेंस मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता बार-बार दलित समाज से जुड़े नेताओं को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा और टिप्पणियां बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और यह दलित समुदाय के सम्मान पर सीधा हमला है।

24 घंटे का अल्टीमेटम

हरपाल सिंह चीमा ने साफ कहा कि प्रताप सिंह बाजवा और कांग्रेस पार्टी को इस बयान के लिए 24 घंटे में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो आम आदमी पार्टी हर स्तर पर जवाब देने के लिए तैयार है।

हरभजन सिंह ईटीओ की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि उन्हें अपने पिता के पेशे पर गर्व है। उन्होंने कहा कि “बैंड बजाने वाले का बेटा होना मेरे लिए शर्म की नहीं, बल्कि सम्मान की बात है।”
ईटीओ ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर परीक्षा पास की और प्रशासनिक सेवा में आए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी टिप्पणियां सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती हैं।

राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर दलित राजनीति और 2027 की तैयारियों के संदर्भ में।

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