पंजाबी दूरदर्शन | जालंधर/चंडीगढ़ डेस्क
पंजाब में हथियार लाइसेंस हासिल करना अब पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। राज्य में बढ़ते अपराधों और हथियारों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस ने लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया है। यह फैसला राज्य में हथियारों के खुले प्रदर्शन और गैर-जरूरी लाइसेंसों पर लगाम लगाने के लिए लिया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कदम गौरव यादव (डीजीपी, पंजाब) के निर्देशों पर उठाया गया है। पंजाब पुलिस पहले ही राज्य सरकार को करीब 8,000 हथियार लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भेज चुकी है, जिनका इस्तेमाल कई बार समारोहों में दिखावे या आपराधिक गतिविधियों में होता पाया गया।
अब कब मिलेगा हथियार लाइसेंस
नए दिशा-निर्देशों के तहत अब हथियार लाइसेंस केवल उन्हीं आवेदकों को जारी किया जाएगा, जिन्हें वास्तव में जान-माल का खतरा साबित होगा। बिना ठोस और विश्वसनीय कारण के लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
इंटेलिजेंस रिपोर्ट होगी अनिवार्य
पहली बार ऐसा किया गया है कि हथियार लाइसेंस के लिए सिर्फ स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट भी अनिवार्य कर दी गई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से सिफारिश या पहुंच के बल पर लाइसेंस न हासिल कर सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पहले सामान्य स्तर पर सिफारिशों के आधार पर लाइसेंस जारी हो जाते थे, लेकिन अब हर आवेदन की गहन जांच की जाएगी। आवेदक की पृष्ठभूमि, व्यवहार, सामाजिक रिकॉर्ड और खतरे की वास्तविकता को परखा जाएगा।
सीमित संख्या में जारी होंगे लाइसेंसी हथियार
पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में राज्य में सीमित संख्या में ही लाइसेंसी हथियार जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य सरकार डिप्टी कमिश्नरों को भी इस संबंध में नए निर्देश जारी करने की तैयारी कर रही है, ताकि पूरे सिस्टम में एकरूपता बनी रहे।
क्यों जरूरी था यह फैसला
पंजाब में देश के अन्य राज्यों की तुलना में हथियार लाइसेंस की संख्या अधिक है। कई मामलों में लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल झगड़ों, शादी समारोहों और आपराधिक घटनाओं में सामने आया है। पुलिस का मानना है कि सख्त नियमों से न केवल अपराधों में कमी आएगी, बल्कि कानून-व्यवस्था भी मजबूत होगी।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि हथियार को शौक या रुतबे का प्रतीक न समझें और कानून का पालन करें। नए नियमों के लागू होने के बाद लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित होगी।

