पंजाबी दूरदर्शन| जालंधर डेस्क
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बुधवार को जालंधर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ आम लोगों से संवाद करने के लिए जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। हालांकि यह कार्यक्रम विवादों में घिरता नजर आया, क्योंकि कई लोगों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मिलने का मौका केवल चुनिंदा व्यक्तियों को ही दिया गया।
मुख्यमंत्री का यह जन संवाद कार्यक्रम जालंधर स्थित सरकारी कोठी में आयोजित किया गया, जो सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक करीब दो घंटे चला। इस दौरान सीएम मान ने अलग-अलग इलाकों से आए प्रतिनिधिमंडलों और कुछ व्यक्तियों से मुलाकात की।
आम लोगों ने लगाए आरोप
कार्यक्रम स्थल के बाहर मौजूद कई नागरिकों ने कहा कि आम जनता के नाम पर आयोजित इस जन संवाद में केवल पार्टी कार्यकर्ताओं, पार्षदों और सिफारिश वाले लोगों को ही प्रवेश दिया गया। आम समस्याएं लेकर पहुंचे लोगों को पुलिस द्वारा बाहर ही रोक दिया गया।
स्थानीय निवासी हरप्रीत कौर ने आरोप लगाया कि वह मुख्यमंत्री से मिलने आई थीं, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा कि कम वेतन पर काम कर रहे कर्मचारी और शिक्षक अपनी मांगें लेकर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी मिलने का मौका नहीं मिला।
इसी तरह, एक अन्य स्थानीय नागरिक सेव सिंह ने कहा कि सरकार जनता से संवाद का दावा तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। उनके अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर केवल नामांकित लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा था।
कुछ लोगों ने की मुलाकात की सराहना
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को सकारात्मक बताया। इंग्लैंड से आए एक एनआरआई ने कहा कि उन्होंने अपनी जमीन से जुड़ा मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा, जिसे सीएम मान ने ध्यानपूर्वक सुना और समाधान का आश्वासन दिया।
फिल्लौर निवासी तरसेम सिंह ने भी बताया कि उन्होंने स्कूल भवन से जुड़ी समस्या रखी, जिस पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया।
सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए जालंधर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और ट्रैफिक व्यवस्था को भी नियंत्रित किया गया, ताकि वीआईपी मूवमेंट और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।
हालांकि जन संवाद का उद्देश्य सरकार और जनता के बीच दूरी कम करना बताया गया, लेकिन जालंधर में हुए इस कार्यक्रम के बाद कई लोगों ने इसे केवल सीमित दायरे तक सिमटा हुआ करार दिया। लोगों का कहना है कि अगर वास्तव में आम जनता तक पहुंच बनानी है, तो ऐसे संवाद कार्यक्रमों में सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।

