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अमृतसर से पंथक राजनीति और सिख संस्थाओं से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ज्ञानी रघबीर सिंह, जो कि सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथी और अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार रह चुके हैं, उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को सीधी चुनौती दी है।
SGPC की ओर से जारी किए गए 72 घंटे के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा है कि यदि उनके उठाए गए सवालों का जवाब तय समय में नहीं दिया गया, तो वे सभी तथ्यों और दस्तावेजों को संगत के सामने सार्वजनिक करेंगे।
72 घंटे के नोटिस पर सख्त प्रतिक्रिया
ज्ञानी रघबीर सिंह ने बताया कि उन्होंने 18 तारीख को जालंधर प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता के दौरान SGPC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके ठीक अगले दिन 19 तारीख को SGPC की कार्यकारी बैठक में उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस नोटिस की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिली, क्योंकि उस समय वे पंजाब से बाहर थे।
“पहले सवालों का जवाब दें SGPC”
ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा—
“जब SGPC के भीतर रोज़ाना कथित अनियमितताएं हो रही हैं और जिन मामलों पर SGPC प्रधान स्वयं संगत से माफी मांग चुके हैं, तब सवाल उठाने वालों को नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है।”
“सच सामने लाना हमारी पंथक जिम्मेदारी”
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि—
“भ्रष्टाचार रोकना और सच सामने लाना हमारी पंथक जिम्मेदारी है। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि SGPC हमारे उठाए सवालों का 72 घंटे में जवाब दे। अगर जवाब नहीं मिला, तो हर तथ्य संगत के सामने रखा जाएगा।”
ज्ञानी रघबीर सिंह ने यह भी दावा किया कि उनके पास हर आरोप से जुड़े दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं।
SGPC पर ये गंभीर आरोप लगाए
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्ञानी रघबीर सिंह ने SGPC पर कई गंभीर सवाल उठाए थे, जिनमें प्रमुख हैं—
🏞️ SGPC जमीनों की बिक्री
उन्होंने आरोप लगाया कि SGPC की जमीनों की बिक्री में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और कई सौदे बिना व्यापक चर्चा के किए जा रहे हैं।
📜 अकाल तख्त हुक्मनामे की अनदेखी
उन्होंने 2 दिसंबर 2024 को जारी अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे का हवाला देते हुए कहा कि उसकी पालना न होने के कारण ही जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाया गया, जो धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
🍞 लंगर की सूखी रोटियों की बिक्री
ज्ञानी रघबीर सिंह ने गुरु घर के लंगर से जुड़ी सूखी रोटियों की बिक्री में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया।
📖 328 पावन स्वरूपों के गुम होने का मामला
उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के गुम होने को अत्यंत गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
पंथक हलकों में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सिख और पंथक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। SGPC की ओर से उठाए गए कदम और ज्ञानी रघबीर सिंह की चुनौती ने आने वाले दिनों में बड़े पंथक टकराव के संकेत दे दिए हैं।

