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यूनाइटेड किंगडम जाने का सपना देख रहे पंजाब के हजारों युवाओं के लिए एक चिंता भरी खबर सामने आई है। ब्रिटेन की कुछ यूनिवर्सिटियों ने पंजाब और हरियाणा के छात्रों के आवेदनों को अस्थायी रूप से स्वीकार करना बंद कर दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पहले ही अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में इमिग्रेशन नियम सख्त हो चुके हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
जानकारी के मुताबिक, ब्रिटेन की कई यूनिवर्सिटियों ने पाया कि—
- कुछ छात्र स्टडी वीज़ा पर UK जाकर पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं
- पढ़ाई के बजाय फुल-टाइम नौकरी करने लगते हैं
- इससे यूनिवर्सिटियों की वीज़ा कंप्लायंस रेटिंग प्रभावित होती है
इसी वजह से यूनिवर्सिटियां अब जोखिम कम करने के लिए कुछ राज्यों से आने वाले छात्रों पर अतिरिक्त सख्ती बरत रही हैं।
फर्जी दस्तावेज भी बने बड़ी वजह
इंटरनल जांच में यह भी सामने आया है कि—
- कुछ मामलों में फर्जी शैक्षणिक सर्टिफिकेट
- गलत बैंक स्टेटमेंट और फंड प्रूफ
- एजेंटों के जरिए भ्रामक जानकारी देकर आवेदन किए गए
इन गड़बड़ियों के कारण यूनिवर्सिटियों ने पंजाब और हरियाणा से आने वाले कुछ कैटेगरी के छात्रों पर रोक लगा दी है।
क्या UK सरकार ने बैन लगाया है?
👉 नहीं।
यह साफ किया गया है कि—
- यह UK सरकार का आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है
- न ही कोई कानूनी बैन लगाया गया है
- यह फैसला यूनिवर्सिटियों ने अपने स्तर पर लिया है
कुछ मामलों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के छात्रों के आवेदनों की भी गहन जांच की जा रही है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज बर्मिंघम की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, University College Birmingham ने अभिभावकों को सूचित किया है कि UK सरकार के नए इंटरनल कंप्लायंस गाइडलाइंस के तहत कुछ क्षेत्रों और कोर्सेज़ पर नई नीति लागू की जा रही है।
इसका उद्देश्य है—
✔ इंटरनेशनल स्टूडेंट स्पॉन्सरशिप को सुरक्षित रखना
✔ वीज़ा नियमों का 100% अनुपालन सुनिश्चित करना
विशेषज्ञों की छात्रों को सलाह
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि—
- केवल मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में ही आवेदन करें
- सभी दस्तावेज पूरी तरह असली और पारदर्शी रखें
- पढ़ाई को प्राथमिक उद्देश्य बनाएं, नौकरी को नहीं
- फर्जीवाड़ा भविष्य के लिए स्थायी वीज़ा बैन का कारण बन सकता है

