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गुरदासपुर में रावी नदी का पंटून पुल तेज बहाव में क्षतिग्रस्त, कई सीमावर्ती गांवों का संपर्क टूटा
पंजाबी दूरदर्शन | बटाला
पंजाब के गुरदासपुर जिले में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण रावी नदी पर बना अस्थायी पंटून पुल तेज बहाव की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के प्रभावित होने से भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित कई सीमावर्ती गांवों का जिला मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है।
कई गांवों की आवाजाही ठप
जानकारी के अनुसार, रावी नदी के मकोड़ा पत्तन क्षेत्र में स्थित यह अस्थायी पुल सीमावर्ती गांवों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग था। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद ममिया, चैबे, टूर बरियाल, मम्मी चकरंजा सहित आसपास के कई गांवों की आवाजाही प्रभावित हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क टूटने से दूध, राशन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। साथ ही मरीजों और अन्य जरूरतमंद लोगों को आने-जाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिना पूर्व सूचना पानी छोड़े जाने का आरोप
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जबकि पहले से कोई चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया। यदि समय रहते सूचना मिल जाती, तो पुल को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते थे।
ग्रामीणों के मुताबिक, पानी का बहाव इतना तेज था कि पहले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ ही देर में पुल का बड़ा हिस्सा बह गया।
प्रशासन से तत्काल राहत की मांग
प्रभावित गांवों के लोगों ने पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक पुल दोबारा तैयार नहीं हो जाता, तब तक लोगों की आवाजाही के लिए सरकारी नाव (बोट) की व्यवस्था की जाए। विशेष रूप से बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक परिवहन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
स्थायी समाधान की उठी मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पंटून पुल को बहाल करने के साथ-साथ भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले सीमावर्ती इलाकों के लोगों को समय पर सूचना देने के लिए प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इससे ऐसी परिस्थितियों में लोगों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकेगी।

