हाईकोर्ट में आज DA पर अहम सुनवाई: पंजाब के 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों की निगाहें फैसले पर
पंजाबी दूरदर्शन | चंडीगढ़
पंजाब के करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (DA) और वेतन आयोग के एरियर से जुड़े मामले में आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। पिछले दो दिनों से यह मामला सूचीबद्ध होने के बावजूद अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी थी।
सरकार की भुगतान योजना पर रहेगी अदालत की नजर
इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पहले पंजाब सरकार को 30 जून तक लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच का रुख किया।
डिवीजन बेंच ने फिलहाल एकल पीठ के आदेश पर रोक नहीं लगाई थी, लेकिन सरकार से बकाया राशि के भुगतान को लेकर विस्तृत योजना सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा था। अब अदालत यह देखेगी कि सरकार भुगतान के लिए क्या रोडमैप लेकर आई है।
किस्तों में भुगतान या अतिरिक्त समय की मांग संभव
आज की सुनवाई के दौरान सरकार वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए किस्तों में भुगतान का प्रस्ताव रख सकती है या अदालत से अतिरिक्त समय मांग सकती है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।
केंद्र और पंजाब के डीए में बड़ा अंतर
वर्तमान में पंजाब सरकार के कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में राज्य के कर्मचारियों का 18 प्रतिशत डीए अभी भी लंबित है। इसी अंतर को समाप्त करने और बकाया राशि जारी करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
कर्मचारी संगठनों की ओर से अदालत में यह दलील दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों के वेतन का अभिन्न हिस्सा है, न कि कोई अतिरिक्त अनुग्रह राशि। इसी आधार पर कर्मचारियों ने लंबित डीए का भुगतान कराने की मांग की है।
आंदोलन की भी चेतावनी
यदि अदालत से राहत नहीं मिलती या भुगतान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं होते, तो कर्मचारी संगठन आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। संगठनों ने संकेत दिया है कि 17 जुलाई को राज्यभर में महारैली और महाबंद की घोषणा की जा सकती है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को भी शामिल किया जाए तो इस मुद्दे से लगभग 40 लाख लोग प्रभावित हैं। ऐसे में अदालत का फैसला लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

