‘सतलुज’ को OTT से हटाने पर स्पीकर कुलतार संधवां ने जताई चिंता, बोले- इतिहास और विचारों पर खुली बहस जरूरी
पंजाबी दूरदर्शन | फरीदकोट
पंजाब विधानसभा के स्पीकर एवं कोटकपूरा से विधायक कुलतार सिंह संधवां ने अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कला और सिनेमा समाज के इतिहास, विचारों और सामाजिक वास्तविकताओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
पारदर्शिता के साथ बताए जाएं कारण
फरीदकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान संधवां ने कहा कि यदि किसी फिल्म को किसी कारणवश प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है या उस पर आपत्ति दर्ज की जाती है, तो संबंधित कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
लोकतंत्र में खुला विमर्श जरूरी
स्पीकर ने कहा कि पंजाब के इतिहास, न्याय और सामाजिक घटनाओं से जुड़े विषयों पर खुली, निष्पक्ष और संवैधानिक तरीके से चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। उनके अनुसार, किसी भी ऐतिहासिक विषय पर संवाद और विमर्श लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
दस्तावेजों पर आधारित होने का किया उल्लेख
कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह फिल्म किसी काल्पनिक कहानी पर आधारित नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई बताई जाती है। ऐसे में यदि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया गया है, तो संबंधित पक्षों को इसके कारणों पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
लोगों के सवालों का मिलना चाहिए जवाब
संधवां ने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि समाज में उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक उत्तर मिल सके। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों और ऐतिहासिक तथ्यों पर चर्चा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और किसी भी निर्णय के पीछे के कारण स्पष्ट रूप से सामने आने चाहिए।
फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल एक फिल्म तक सीमित न रहकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, इतिहास और सार्वजनिक विमर्श से जुड़े व्यापक विषय के रूप में चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।

