Dr. Gurpreet Kaur Defamation Case: CM मान की पत्नी ने 3 नेताओं पर किया केस, मजीठिया-हरसिमरत-खैहरा पर लगाए आरोप
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपने खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए आपत्तिजनक और झूठे आरोपों को लेकर अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया, हरसिमरत कौर बादल और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ चंडीगढ़ की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में डॉ. गुरप्रीत कौर ने आरोप लगाया है कि तीनों नेताओं की ओर से ऐसे बयान और सामग्री सामने रखी गई, जिनसे उनकी व्यक्तिगत छवि और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 से संबंधित बताया गया है।
पहले भेजा था मानहानि का नोटिस
डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से इससे पहले तीनों नेताओं को कानूनी नोटिस भेजकर कथित आरोपों पर माफी मांगने को कहा गया था। शिकायत के मुताबिक, निर्धारित समय में माफी नहीं मांगी गई।
उनके अनुसार, सुखपाल सिंह खैहरा ने उनके द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस पर भी आपत्ति जताई थी और कथित तौर पर नोटिस को फाड़कर फेंक दिया था।
मजीठिया पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाने का दावा
डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपनी शिकायत में कहा है कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने 1 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए।
शिकायत के मुताबिक, मजीठिया ने आरोप लगाया था कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपने किसी रिश्तेदार के जरिए बलात्कार के एक आरोपी को बचाने के लिए सरकारी तंत्र को प्रभावित करने के बदले पैसों की मांग की थी।
डॉ. गुरप्रीत कौर ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
ऑडियो, तस्वीरों और CCTV का भी जिक्र
शिकायत में दावा किया गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरें और CCTV फुटेज दिखाकर कुछ लोगों के पैसों के लेन-देन में शामिल होने का दावा किया गया।
डॉ. गुरप्रीत कौर का आरोप है कि इन बयानों और सामग्री के जरिए उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया गया और उनकी पहचान को एक गंभीर आपराधिक मामले के आरोपी की मदद करने से जोड़ने का प्रयास किया गया।
उन्होंने अदालत से तीनों नेताओं को मामले में तलब करने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की है।
BNS की धारा 356 में क्या प्रावधान है?
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला बताया गया है। दोष सिद्ध होने पर इस प्रावधान के तहत कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
हालांकि, किसी अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने से पहले शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
क्रिमिनल मानहानि केस की प्रक्रिया
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एएस बरनाला के अनुसार, आपराधिक मानहानि की शिकायत आम तौर पर मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल की जाती है। शिकायतकर्ता को यह बताना होता है कि कथित मानहानिकारक बयान कब, कहां और किस तरह दिए गए।
इसके बाद अदालत शिकायतकर्ता और उसके गवाहों के शुरुआती बयान दर्ज कर सकती है तथा उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों पर विचार कर सकती है।
यदि अदालत को प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मिलता है तो आरोपी को समन जारी किया जा सकता है। इसके बाद आरोपी की पेशी, गवाहों की गवाही, जिरह और दोनों पक्षों की दलीलों की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पहले भी आया था कोर्ट का आदेश
इससे पहले एक अलग मामले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. परीक्षित की अदालत ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह, बिक्रम सिंह मजीठिया और सुखपाल सिंह खैहरा को सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर रिश्वत की मांग से संबंधित कथित अनवैरिफाइड और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट करने से अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया था।
डॉ. गुरप्रीत कौर की वर्तमान शिकायत पर अदालत आगे क्या कार्रवाई करती है, यह शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की न्यायिक जांच के बाद तय होगा।

