पंजाबी डोरदर्शन | चंडीगढ़ डेस्क
पंजाब के खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की ओर से दायर याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार को 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। यह याचिका संसद के आगामी बजट सत्र में शामिल होने के लिए अस्थायी पैरोल न दिए जाने को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अमृतपाल सिंह के वकील से यह सवाल किया कि उनकी पैरोल किस ठोस आधार पर खारिज की गई। इस पर बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से केवल “राज्य की सुरक्षा” का हवाला दिया गया है, लेकिन इसके समर्थन में कोई स्पष्ट और ठोस कारण पेश नहीं किया गया।
वकील ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि एक अन्य सांसद पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें संसद की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी गई है। ऐसे में अमृतपाल सिंह को बजट सत्र में शामिल होने से रोकना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
लोकसभा स्पीकर का पत्र अदालत में पेश
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने लोकसभा स्पीकर का एक पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। इस पत्र में कहा गया है कि किसी सांसद को पैरोल देने या न देने का अधिकार पूरी तरह से स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के पास है। इस प्रक्रिया में लोकसभा स्पीकर की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती।
हाईकोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करे। अब इस केस में अगली सुनवाई पंजाब सरकार के जवाब के बाद तय की जाएगी।
यह मामला राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक निर्वाचित सांसद के संसदीय अधिकारों और राज्य की सुरक्षा के बीच संतुलन का प्रश्न जुड़ा हुआ है।

