Amritsar Post Office Language Dispute: दिल्ली के कर्मचारी को पंजाबी बोलने पर मजबूर किया, वीडियो वायरल
अमृतसर | Punjabi Doordarshan Desk
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद के बाद अब पंजाब के अमृतसर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां डाकघर में तैनात पोस्टल असिस्टेंट विशाल सिंह, जो मूल रूप से दिल्ली के निवासी हैं, को एक युवक द्वारा पंजाबी पढ़ने और बोलने के लिए दबाव बनाया गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह घटना 30 दिसंबर की बताई जा रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक डाक कर्मचारी से कह रहा है,
“पंजाब में हो तो पंजाबी आनी चाहिए।”
डाकघर में हुई तीखी नोकझोंक
वायरल वीडियो में युवक और पोस्टल असिस्टेंट के बीच रजिस्ट्री को लेकर तीखी बहस होती दिखाई दे रही है। विशाल सिंह बार-बार स्पष्ट करते हैं कि उन्हें पंजाबी भाषा नहीं आती और वे हिंदी व अंग्रेजी में बात कर सकते हैं। इसके बावजूद युवक उन पर पंजाबी बोलने का दबाव बनाता है।
पोस्टल असिस्टेंट ने रखी तीन अहम बातें
पोस्टल असिस्टेंट विशाल सिंह ने पहली बार इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
- डाक विभाग केंद्र सरकार के अधीन है और कर्मचारियों की पोस्टिंग देश के किसी भी हिस्से में हो सकती है। आधिकारिक कामकाज हिंदी और अंग्रेजी में होता है।
- हर राज्य की भाषा सीखना व्यावहारिक नहीं, क्योंकि कल उनकी पोस्टिंग किसी अन्य राज्य में भी हो सकती है।
- डाकघर में वीडियो बनाना निजता का गंभीर उल्लंघन है, क्योंकि वहां लोगों के निजी दस्तावेज और आर्थिक लेन-देन से जुड़ी जानकारी होती है।
उन्होंने इस मामले में युवक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
डाक विभाग की प्रतिक्रिया
डाकघर के डिप्टी पोस्टमास्टर गुरशरणजीत सिंह ने कहा कि उनके कर्मचारी को डराया-धमकाया गया है और विभाग इस मामले में उचित कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से विभाग की छवि खराब होती है।
डीसी को सौंपा गया ज्ञापन
उधर, अकाली दल वारिस पंजाब से जुड़े शमशेर सिंह पद्धरी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीसी अमृतसर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि सभी सरकारी दफ्तरों में पंजाबी भाषा अनिवार्य की जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी बोर्ड पहले पंजाबी, फिर हिंदी और अंग्रेजी में होने चाहिए।
पद्धरी ने दावा किया कि वायरल वीडियो उन्होंने ही बनाया है और यह पंजाबी भाषा की उपेक्षा को उजागर करता है।
मामला गरमाया
यह मामला अब केवल डाकघर की बहस नहीं रहा, बल्कि भाषा और संवैधानिक अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है। प्रशासन की कार्रवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस विवाद का कानूनी परिणाम क्या निकलता है।

