चंडीगढ़:
पंजाब की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने चिर-परिचित तीखे अंदाज़ में ऐसा बयान दिया है, जिसे डेरा ब्यास प्रमुख पर संकेतात्मक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा,
“अदालतों का भी रब्ब राखा, जहां मुलाकाती ही जज बन जाएं…”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
दरअसल, शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिली। खास बात यह रही कि ज़मानत मिलने से कुछ ही देर पहले डेरा ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने नाभा जेल में मजीठिया से मुलाकात की थी।
इस मुलाकात के समय और उसके तुरंत बाद ज़मानत मिलने को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का ताज़ा बयान इसी घटनाक्रम की ओर इशारा करता है, हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।

जेल में हुई मुलाकात के बाद डेरा ब्यास प्रमुख ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मजीठिया पर लगे ड्रग्स और आय से अधिक संपत्ति के आरोप निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजीठिया उनके मित्र और रिश्तेदार हैं और रिश्तेदारी के नाते उनसे मिलने जाना स्वाभाविक है।
डेरा प्रमुख ने यह भी कहा कि सरकार और कानून अपना काम कर रहे हैं और उन्हें किसी पर टिप्पणी करना उचित नहीं लगता।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान और मजीठिया की ज़मानत के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

