कर्नल पुष्पिंदर बाठ से मारपीट मामले में बड़ी कार्रवाई, 4 पुलिस अधिकारियों पर CBI की चार्जशीट
Punjabi Doordarshan | पंजाब डेस्क | 25 दिसंबर 2025
सेना के कर्नल पुष्पिंदर बाठ के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहाली की अदालत में पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर पहले ही कई सवाल खड़े कर चुका है।
CBI की चार्जशीट के अनुसार इस केस में इंस्पेक्टर रॉनी सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उनके साथ हरजिंदर सिंह, शमिंदर सिंह और हैरी बोपराई को भी आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में इन पुलिस अधिकारियों पर गंभीर चोट पहुंचाने, अवैध रूप से रोकने और आपराधिक धमकी समेत कई धाराएं लगाई गई हैं।
हालांकि, CBI ने चार्जशीट में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से जुड़ी धारा को शामिल नहीं किया है, जबकि प्रारंभिक FIR में यह धारा दर्ज थी।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार यह घटना 13 मार्च की रात लगभग 12 बजे पटियाला के राजिंदरा अस्पताल के पास हुई थी। कर्नल पुष्पिंदर बाठ अपने बेटे अंगद बाठ के साथ ढाबे पर मैगी खाने के लिए रुके थे। इसी दौरान वहां 7 से 8 पुलिसकर्मी एक गाड़ी में पहुंचे और उनकी कार को रॉन्ग साइड खड़ी बताकर विवाद शुरू कर दिया।
देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कर्नल बाठ और उनके बेटे को डंडों से पीटा, लातें मारीं और उनकी गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया। जब कर्नल बाठ ने अपना आर्मी आईडी कार्ड दिखाया, तब भी पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से उन्हें धमकाते हुए कहा कि “यहीं एनकाउंटर कर देंगे”।
घटना के बाद दोनों को तुरंत राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती करवाया गया।
FIR और कानूनी कार्रवाई
इस मामले में CBI ने इंस्पेक्टर रॉनी सिंह समेत चारों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं शामिल की गई थीं। जांच के दौरान एक अन्य इंस्पेक्टर की भूमिका भी सामने आई, जिसे अलग-अलग धाराओं में नामजद किया गया।
विधानसभा और हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
यह मामला पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में भी उठा था। कर्नल बाठ की पत्नी के मीडिया में सामने आने के बाद पंजाब सरकार ने SIT गठित की थी। बाद में पंजाब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच CBI को सौंप दी गई।
फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

