पंजाबी दूरदर्शन | नई दिल्ली
दिल्ली शराब नीति मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI द्वारा दर्ज मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके और साजिश का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी की पूरी कहानी अनुमानों पर आधारित थी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि CBI आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रही। इसी आधार पर कुल 23 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार करते हुए सभी को बरी कर दिया गया।
हालांकि, निचली अदालत के फैसले के करीब छह घंटे बाद CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और फैसले को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की है।
कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में सिर्फ ईमानदारी की कमाई की है और आज यह अदालत के फैसले से साबित हो गया। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी और उसके नेता ईमानदार हैं और न्यायपालिका पर उन्हें हमेशा भरोसा रहा है।
वहीं मनीष सिसोदिया ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें भारतीय संविधान और संविधान निर्माता बी. आर. अंबेडकर पर गर्व है। उन्होंने इसे “सच की जीत” बताया।
कोर्ट के बाहर दिए बयान में केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत आम आदमी पार्टी के नेताओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि सत्ता की राजनीति के बजाय देश की असली समस्याओं—महंगाई, बेरोजगारी, प्रदूषण और बुनियादी ढांचे—पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और कानूनी प्रक्रिया और आगे बढ़ने की संभावना है।

