Punjabi Doordarshan | जालंधर डेस्क
जालंधर: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब वैश्विक उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। तेल से लेकर कई कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल के कारण उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में कम दिखे खरीदार
जर्मनी के कोलोन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में इस बार भारतीय हैंड टूल्स निर्यातकों को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में मेले में प्रतिभागियों और खरीदारों की संख्या काफी कम रही।
उद्योग पर बढ़ा लागत का दबाव
एच.आर. इंटरनेशनल के चेयरमैन नरेश शर्मा के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के तनाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सीधा असर उद्योग पर पड़ा है।
उन्होंने बताया कि
- स्टील की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है
- तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ गई है
- उत्पादन लागत में भी भारी इजाफा हुआ है
प्लास्टिक और गैस की कीमतों में भी उछाल
उद्योग जगत के अनुसार प्लास्टिक दाने की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं औद्योगिक गैसों के दामों में लगभग 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
उत्पादन प्रक्रिया पर असर
कई तेल आधारित उत्पादों की कमी के कारण उद्योगों की उत्पादन प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। इससे खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
सरकार से राहत पैकेज की मांग
उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण और निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज पर विचार किया जाए, ताकि भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रख सके।

