पंजाब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ! हिमाचल सरकार ने लिया नया फैसला, जानिए पूरा मामला
पंजाब डेस्क | Punjabi Doordarshan
हिमाचल प्रदेश सरकार के एक ताजा फैसले ने पंजाब की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। हिमाचल सरकार द्वारा हाइड्रो पावर परियोजनाओं पर 2 प्रतिशत लैंड रेवेन्यू सेस लागू करने के बाद पंजाब को हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।
BBMB परियोजनाओं पर असर
जानकारी के अनुसार, इस फैसले से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के अंतर्गत आने वाली तीन बड़ी परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 433 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक बोझ बढ़ जाएगा। यह अतिरिक्त खर्च पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को साझा रूप से वहन करना होगा।
BBMB ने जताई आपत्ति
BBMB ने हिमाचल सरकार के समक्ष इस फैसले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। 3 जनवरी को हुई बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सेस राज्य की सभी हाइड्रो पावर परियोजनाओं पर लागू किया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2023 में हिमाचल सरकार द्वारा लगाए गए जल उपकर को केंद्र सरकार ने अवैध करार दिया था।
12 दिसंबर को जारी हुई अधिसूचना
हिमाचल सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है और प्रभावित राज्यों से इस पर आपत्तियां मांगी हैं।
पंजाब सरकार ने 24 दिसंबर को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ये परियोजनाएं व्यावसायिक नहीं बल्कि जनहित से जुड़ी हैं, और भूमि अधिग्रहण के दौरान पहले ही मुआवजा दिया जा चुका है।
पंजाब सरकार का तर्क
पंजाब सरकार का कहना है कि यदि लैंड रेवेन्यू लगाया भी जाता है तो वह केवल जमीन के मूल्य पर होना चाहिए, न कि पूरी परियोजना लागत पर।
आगे क्या होगा?
इस फैसले को लेकर आने वाले समय में राज्यों और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।

