हिमाचल प्रदेश। सरकार ने बीपीएल परिवारों के चयन के लिए नए मानदंड तय किए हैं। संबंधित पंचायत सचिव की ओर से ग्राम सभा की पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बीपीएल परिवारों के चयन के लिए नए मानदंड निर्धारित किए हैं। अब संबंधित पंचायत सचिव ग्राम सभा की संपूर्ण कार्यवाही की वीडियोग्राफी सुनिश्चित करेंगे, जिसे पंचायत समिति के उपलब्ध धन के अंतर्गत किया जाएगा और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। इस संबंध में ग्रामीण विकास सचिव राजेश शर्मा ने आधिकारिक आदेश जारी किए हैं।
नए निर्देशों के अनुसार, ऐसे परिवार जिनमें 18 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चे हों और केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध सदस्य हों, जबकि 18 से 59 वर्ष के बीच का कोई भी वयस्क सदस्य न हो, उन्हें बीपीएल सूची में शामिल किया जाएगा। इसी तरह, महिला मुखिया वाले परिवार, जिनमें 18 से 59 वर्ष का कोई वयस्क सदस्य न हो, या जिनके मुखिया में 50% से अधिक दिव्यांगता हो, वे भी इस सूची में पात्र होंगे।
इसके अतिरिक्त, बीपीएल सूची में शामिल होने के इच्छुक परिवारों को हर वर्ष 31 जनवरी तक आवश्यक घोषणा के साथ ग्राम पंचायत में आवेदन जमा करना होगा। यदि किसी परिवार को बीपीएल सूची से हटाने की सिफारिश की जाती है, तो इसके लिए प्रस्ताव ग्राम सभा में रखा जाएगा। पूरी प्रक्रिया को प्रत्येक वर्ष 15 मई तक पूरा कर लिया जाएगा।
व्यस्क सदस्यों ने मनरेगा के तहत 100 दिन का काम किया हो। जिनके कमाने वाले सदस्य कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं और वे स्थायी रूप से अक्षम हो गए हैं, वे भी इस सूची में आएंगे। पक्का मकान और आयकर देने वाले सदस्य इससे बाहर होंगे यह सालाना सीमा 36 हजार रुपये थी। अब यह 50 हजार रुपये होगी। एक हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले और जिनका कोई भी सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी या निजी नौकरी में है, वे बीपीएल सूची से हटा दिए जाएंगे।
प्रत्येक परिवार के मुखिया से सादे कागज पर शपथ एवं घोषणापत्र लिया जाएगा कि उसके परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। उसका परिवार आयकर नहीं देता है और उसके परिवार की समस्त स्रोतों से अर्जित वार्षिक आय 50 हजार रुपये से अधिक नहीं है। उसके परिवार के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि नहीं है। उसके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी या अर्द्धसरकारी या निजी नौकरी में नहीं है। यदि बीपीएल परिवार का कोई सदस्य ग्राम पंचायत में अपना नाम अलग परिवार के रूप में है दर्ज कराने के लिए आवेदन करता तो उस स्थिति में ऐसे नए परिवार को अगले 3 वर्षों तक बीपीएल सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।