चंडीगढ़:
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस चर्चा को और बल उस वक्त मिला, जब फिरोजपुर में आयोजित नशामुक्ति पदयात्रा के दौरान दोनों दलों के शीर्ष नेता एक ही मंच पर नजर आए।
गवर्नर की पदयात्रा, एक मंच पर अकाली–BJP
मंगलवार को फिरोजपुर में पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने नशामुक्ति को लेकर पदयात्रा निकाली। इस कार्यक्रम में—
- सुखबीर सिंह बादल
- अश्विनी शर्मा
एक साथ शामिल हुए। वर्ष 2020 में अकाली–BJP गठबंधन टूटने के बाद यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब दोनों दलों की शीर्ष लीडरशिप किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में एक साथ दिखी।
बंद कमरे की बैठक ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी
पदयात्रा के बाद एक सरकारी स्कूल में डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों और गवर्नर गुलाब चंद कटारिया के बीच करीब 22 मिनट की बंद कमरे की बैठक हुई।
इस बैठक में अश्विनी शर्मा और राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी भी मौजूद थे।
हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे अकाली–BJP गठबंधन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

विपक्ष का हमला
इस घटनाक्रम पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है—
- कांग्रेस ने गवर्नर की यात्रा को “समझौता एक्सप्रेस” करार दिया
- आम आदमी पार्टी (AAP) ने कहा कि गवर्नर की पदयात्रा से “राजनीति की महक” आ रही है
विरोधी दलों का आरोप है कि जिन दलों पर पंजाब में नशे को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं, वही अब नशामुक्ति मंच पर एक साथ नजर आ रहे हैं।
डेरा ब्यास की भूमिका क्यों चर्चा में
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डेरा ब्यास प्रमुख की बढ़ती सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कारण यह है कि—
- हाल ही में जेल से रिहा हुए पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया
- पदयात्रा के बाद डेरा ब्यास जाकर बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मिले
मजीठिया पहले से ही अकाली–BJP गठबंधन की पैरवी करते रहे हैं। इससे पहले भी डेरा प्रमुख की भूमिका को लेकर सियासत गरमा चुकी है, जब उनकी मुलाकात के कुछ समय बाद ही मजीठिया को जमानत मिली थी।
राजनीति गरम, तस्वीर साफ नहीं
फिलहाल अकाली दल या भाजपा की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन फिरोजपुर की पदयात्रा और बंद कमरे की बैठक ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावनाएं अब खुलकर चर्चा में हैं।

