Punjab Ground Water Crisis: 16 जिलों में जहरीला हुआ पानी, यूरेनियम-आर्सेनिक से कैंसर और किडनी रोग का खतरा
लुधियाना | Punjabi Doordarshan Desk
पंजाब का ग्राउंड वाटर तेजी से जहरीला होता जा रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट की चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के 16 जिलों के भूमिगत जल में यूरेनियम और आर्सेनिक की मात्रा तय मानकों से कई गुना अधिक पाई गई है।
डराने वाले आंकड़े
CGWB द्वारा लिए गए सैंपलों में
- 62.5% सैंपलों में यूरेनियम WHO मानक (30 ppb) से अधिक पाया गया
- कुछ जिलों में यूरेनियम की मात्रा 200 ppb तक दर्ज की गई
- 4.8% सैंपलों में आर्सेनिक की मात्रा 10 ppb से अधिक पाई गई
WHO के अनुसार,
- यूरेनियम की सुरक्षित सीमा: 30 ppb
- आर्सेनिक की सुरक्षित सीमा: 10 ppb
इन जिलों में हालात सबसे गंभीर
तरनतारन, पटियाला, संगरूर, मोगा, मानसा, बरनाला, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, फरीदकोट, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, अमृतसर, फतेहगढ़ साहिब, बठिंडा
विशेष रूप से संगरूर और बठिंडा में यूरेनियम 200 ppb से ऊपर पाया गया है।
प्री और पोस्ट मानसून रिपोर्ट
- प्री-मानसून: 53.04% सैंपल फेल
- पोस्ट-मानसून: 62.5% सैंपल फेल
देशभर में पंजाब की स्थिति सबसे खराब, दूसरे स्थान पर हरियाणा रहा।
कारण क्या हैं?
ग्राउंड वाटर विशेषज्ञ रिटायर्ड कर्नल जे.एस. गिल बताते हैं:
- अत्यधिक ट्यूबवेल दोहन
- गहराई में खनिज परतों के टूटने से यूरेनियम-आर्सेनिक रिसाव
- रासायनिक खादों से ग्राउंड वाटर कंटामिनेशन
सेहत पर खतरनाक असर
यूरेनियम:
- किडनी फेल्योर
- कैंसर
- कोशिकाओं को स्थायी नुकसान
आर्सेनिक:
- त्वचा, फेफड़े और ब्लड कैंसर
- हार्ट व रेस्पिरेटरी सिस्टम को नुकसान
विशेषज्ञों की चेतावनी
कर्नल गिल ने सरकार से अपील की है:
- प्रभावित इलाकों में नहरी पानी की सप्लाई
- पीने के पानी के लिए RO सिस्टम अनिवार्य
- खेती के लिए भूमिगत जल का प्रयोग तुरंत रोका जाए
उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय “डबल मार” झेल रहा है —
नदियों का पानी औद्योगिक कचरे से और ज़मीन का पानी यूरेनियम-आर्सेनिक से प्रदूषित हो चुका है।

