Punjabi Doordarshan | विशेष रिपोर्ट
चंडीगढ़: Punjab and Haryana High Court ने पेंशन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की राहत केवल निर्धारित कानूनी नियमों के तहत ही दी जा सकती है।
कोर्ट ने State Bank of India (SBI) के सेवानिवृत्त कर्मचारी खरती राम मैनी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने लंबे समय बाद पेंशन पुनर्निर्धारण (रिवीजन) की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की पेंशन वर्ष 1993 में लागू नियमों के अनुसार तय की गई थी और उसी आधार पर उसे मान्यता दी जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वेतन संशोधन के आधार पर पेंशन में बदलाव तभी संभव है, जब इसके लिए स्पष्ट और वैध नियम मौजूद हों।
इसके अलावा, कोर्ट ने वर्ष 2006 के एक सर्कुलर को पूर्व प्रभाव (retrospective effect) से लागू करने से भी इनकार कर दिया। अदालत का कहना था कि सेवा से जुड़े मामलों में लंबे समय बाद किए गए दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते।
अंत में, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस कानूनी अधिकार स्थापित नहीं कर पाया, जिसके चलते याचिका को खारिज कर दिया गया।
यह फैसला पेंशन धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि पेंशन से जुड़े मामलों में नियमों और समयसीमा का पालन बेहद जरूरी है।

