चंडीगढ़:
पंजाब की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पंजाब अनुसूचित जाति आयोग ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा को तलब किया। मामला आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ को लेकर दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है।
आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने प्रताप बाजवा को 11 फरवरी दोपहर 3 बजे आयोग के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अमृतसर रूरल पुलिस से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट भी मांगी गई है।
AAP का चंडीगढ़ में प्रदर्शन
इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चंडीगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया। AAP कार्यकर्ता बैंड-बाजा बजाते हुए सेक्टर-4 स्थित MLA हॉस्टल की ओर बढ़े, जहां प्रताप बाजवा का आवास है।
हालांकि, चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें करीब 15 कदम पहले ही बैरिकेड लगाकर रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछारें कीं।
नेताओं को हिरासत में लिया गया
पुलिस कार्रवाई के दौरान कई वरिष्ठ AAP नेताओं को हिरासत में लिया गया, जिनमें—
- हरपाल सिंह चीमा
- हरभजन सिंह ईटीओ
- डॉ. बलबीर सिंह
शामिल थे। करीब 4 घंटे बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
विवाद की जड़ क्या है
यह पूरा विवाद उस बयान से शुरू हुआ, जो प्रताप सिंह बाजवा ने अजनाला में एक रैली के दौरान दिया था। उन्होंने कहा था कि—
“हरभजन ईटीओ पहले बैंड बजाता था, अब वह पंजाब का बैंड बजा रहा है।”
इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि—
“किसी की गर्दन मरोड़ने में सिर्फ 3 मिनट लगते हैं।”
मंत्री हरभजन ईटीओ का पलटवार
AAP नेताओं की ओर से इन बयानों को दलित समुदाय का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध किया गया। मंत्री हरभजन ईटीओ ने कहा कि—
“जो लोग साधारण नौकरी के लायक नहीं थे, वे राजनीति में बड़े पदों पर पहुंच गए। हमारी पार्टी के नेता मेहनत और संघर्ष से यहां तक पहुंचे हैं।”
अब आगे क्या
पंजाब SC कमीशन की कार्रवाई के बाद यह मामला कानूनी और संवैधानिक दायरे में प्रवेश कर चुका है। 11 फरवरी को प्रताप बाजवा की पेशी के बाद यह साफ होगा कि आयोग आगे क्या कदम उठाता है।

