पंजाब में स्कूली बच्चों के भारी बैग पर सख्त निर्देश: अब तय सीमा से ज्यादा वजन नहीं होगा

Punjabi Doordarshan | शिक्षा डेस्क

लुधियाना:
स्कूल जाने वाले बच्चों के कंधों पर लटकते भारी बैग को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही थी। अब इस समस्या को ध्यान में रखते हुए State Council of Educational Research and Training (SCERT) पंजाब ने स्कूल बैग के वजन को कम करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर फैसला

शिक्षा विभाग का कहना है कि जरूरत से ज्यादा भारी स्कूल बैग बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। इससे कम उम्र में ही छात्रों को पीठ, कंधे और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं होने लगी हैं।

इसी को देखते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी, एडेड और निजी स्कूलों में इन नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

स्कूलों को दिए गए प्रमुख निर्देश

नई गाइडलाइन के तहत स्कूलों को कई जरूरी कदम उठाने को कहा गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • विद्यार्थियों को केवल टाइम-टेबल के अनुसार किताबें और कॉपियां लाने के लिए प्रेरित करना।
  • महीने में कम से कम एक बार स्कूल बैग का निरीक्षण करना।
  • स्कूलों में अलमारी या रैक की व्यवस्था करना ताकि कुछ किताबें स्कूल में ही रखी जा सकें।
  • मॉर्निंग असेंबली में बच्चों को भारी बस्तों के नुकसान के बारे में जागरूक करना।

क्लास के अनुसार तय किया गया बैग का वजन

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार किसी भी छात्र के बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए

कक्षा अनुसार निर्धारित सीमा:

  • प्री-प्राइमरी – कोई बैग नहीं
  • कक्षा 1–2 – 1.6 से 2.2 किलोग्राम
  • कक्षा 3–5 – 1.7 से 2.5 किलोग्राम
  • कक्षा 6–7 – 2 से 3 किलोग्राम
  • कक्षा 8 – 2.5 से 4 किलोग्राम
  • कक्षा 9–10 – 2.5 से 4.5 किलोग्राम
  • कक्षा 11–12 – 3.5 से 5 किलोग्राम

ये दिशानिर्देश Central Board of Secondary Education और National Council of Educational Research and Training की सिफारिशों के अनुरूप हैं।

स्टडी में सामने आई चिंताजनक स्थिति

चंडीगढ़ में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सरकारी स्कूलों के करीब 69.7% और निजी स्कूलों के 80% से अधिक बच्चे तय सीमा से ज्यादा वजन वाले बैग लेकर स्कूल आ रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार भारी बैग वाले बच्चों में कमर, कंधे और गर्दन दर्द की शिकायत सामान्य बच्चों की तुलना में कई गुना ज्यादा पाई गई।

लागू करवाना बड़ी चुनौती

हालांकि निर्देश जारी होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इन्हें सख्ती से लागू करवाने की होगी। अक्सर देखा गया है कि कई निजी स्कूल इन आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे अभिभावकों और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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