पंजाबी दूरदर्शन| पंजाब डेस्क
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केंद्र सरकार ने अहम और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों के आधिकारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ बजाए जाने के दौरान सभी उपस्थित लोगों के लिए सम्मान स्वरूप खड़े होना अनिवार्य होगा।
नए दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’—दोनों का आयोजन किया जाता है, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान सभी को सावधान की मुद्रा में खड़े होकर सम्मान प्रकट करना होगा।
अब पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा
अब तक अधिकतर कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन नए निर्देशों के तहत इसके सभी छह छंदों वाला पूरा संस्करण बजाया जाएगा। इस गीत की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी। सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय गीत की गरिमा और एकरूपता बनी रहेगी।
इन अवसरों पर होगा अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ का पालन इन आयोजनों में अनिवार्य रहेगा:
- तिरंगा फहराने के समय
- राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन व संबोधन से पहले और बाद में
- पद्म पुरस्कार जैसे राष्ट्रीय नागरिक सम्मान समारोहों में
- सरकारी स्कूलों और आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में
हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि ये दिशा-निर्देश सिनेमा हॉल पर लागू नहीं होंगे। फिल्मों से पहले ‘वंदे मातरम्’ बजाना या उसके लिए खड़ा होना अनिवार्य नहीं किया गया है।
ऐतिहासिक महत्व
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया था। समय-समय पर इसके स्वरूप को लेकर बहस भी होती रही है, लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि नए दिशा-निर्देशों से राष्ट्रीय गीत को उचित सम्मान और स्पष्ट पहचान मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य
प्रशासन के अनुसार, इस फैसले का मकसद ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति को लेकर सभी सरकारी आयोजनों में एक समान नियम लागू करना और इसके मान-सम्मान को और मजबूत करना है। अब सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में तय मानकों के अनुसार ही ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति होगी।

