जालंधर
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर Bharatiya Janata Party ने मोगा से अपने अभियान का शंखनाद किया है। शनिवार को मोगा के किल्ली चाहलां गांव में आयोजित बदलाव रैली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah मुख्य रूप से शामिल हुए।
रैली के बाद मोगा भाजपा अध्यक्ष हरजोत सिंह ने बताया कि मोगा को रैली के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह पंजाब का केंद्रीय शहर (सेंटर सिटी) माना जाता है।
मोगा से रैली करने की राजनीतिक परंपरा
पंजाब की राजनीति में मोगा का खास महत्व माना जाता है। पिछले कई दशकों में कई राजनीतिक दलों ने यहां से अपने अभियान की शुरुआत की और बाद में उन्हें चुनावी सफलता भी मिली।
1974 की छात्र संग्राम रैली
राजनीतिक इतिहास के अनुसार 1974 में मोगा में हुई ‘संग्राम रैली’ एक बड़ा छात्र आंदोलन बन गई थी। इस रैली में लाखों छात्रों ने भाग लिया था और यह आंदोलन पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बन गया था।
1996 में अकाली दल का अभियान
Shiromani Akali Dal ने भी 1996 में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मोगा से की थी। इसके बाद 1997 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 117 में से 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई।
कांग्रेस की ‘कैप्टन लाओ’ रैली
इसी तरह Indian National Congress ने 2017 चुनावों से पहले मोगा के बाघापुराना में ‘कैप्टन लाओ’ रैली आयोजित की थी। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने 117 में से 77 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की।
AAP की गारंटी भी यहीं से
वर्तमान में पंजाब की सत्ता में काबिज Aam Aadmi Party ने भी 2022 चुनावों से पहले मोगा में रैली के दौरान महिलाओं को आर्थिक सहायता की गारंटी का ऐलान किया था। इसके बाद चुनाव में पार्टी को 117 में से 92 सीटें मिली थीं।
अब BJP की नजर 2027 पर
अब भाजपा ने भी मोगा से ही अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी मोगा के राजनीतिक प्रतीकवाद का फायदा उठाकर 2027 के चुनावों में मजबूत संदेश देना चाहती है।
हालांकि भविष्य में चुनावी नतीजे क्या होंगे, यह समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल मोगा की रैली को पंजाब की राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

