पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र 22 से 27 अक्टूबर तक, सिर्फ दो दिन होगा कामकाज; विपक्ष सरकार को घेरेगा
पहले दिन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि और गैर-सरकारी कामकाज; बेअदबी कानून में संशोधन, कर्मचारियों की हड़ताल और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर हंगामे के आसार
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र 22 अक्टूबर से शुरू होकर 27 अक्टूबर तक चलेगा। सत्र के दौरान पहले दिन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी और गैर-सरकारी कामकाज निपटाया जाएगा। हालांकि, छह दिनों की अवधि वाले इस सत्र में केवल दो दिन ही कामकाज होने की जानकारी सामने आई है।
सत्र के दौरान राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने से जुड़े कानून में संशोधनों को लेकर भी सदन में हंगामे के आसार हैं।
केंद्र सरकार और व्यापार समझौते पर चर्चा की संभावना
विधानसभा सत्र में आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठा सकती है। अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में प्रस्ताव लाए जाने की भी संभावना है।
पंजाब सरकार ने इस समझौते के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करने की बात कही है। ऐसे में किसानों से जुड़े मुद्दे सदन की चर्चा में प्रमुखता से उठ सकते हैं। हालांकि, इन विषयों पर अंतिम एजेंडा और सदन की कार्यवाही के दौरान ही स्पष्टता आएगी।
कर्मचारियों की हड़ताल और बेअदबी कानून पर नजर
सत्र के दौरान सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा विपक्ष उठा सकता है। कर्मचारी संगठनों की मांगों और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर सदन में बहस होने की संभावना है।
इसके अलावा, बेअदबी रोकने से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर भी चर्चा हो सकती है। इस मुद्दे पर पहले भी विधानसभा में विधायी कार्रवाई हो चुकी है, इसलिए आगामी सत्र में इससे जुड़े प्रावधानों को लेकर राजनीतिक बहस अहम रह सकती है।
2026 में अब तक विधानसभा के चार सत्र
पंजाब विधानसभा में वर्ष 2026 के दौरान बजट सत्र, दो विशेष सत्र और मानसून सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। इन सत्रों में बजट, बेअदबी रोकने के लिए कानून, विश्वास प्रस्ताव और विभिन्न विधेयकों पर चर्चा हुई।
1. बजट सत्र: 6 से 16 मार्च
पंजाब विधानसभा का बजट सत्र 6 मार्च से शुरू हुआ। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 8 मार्च को राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान सात विधेयकों को मंजूरी मिली। विपक्ष ने राज्य के कर्ज, कानून-व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा।
2. पहला विशेष सत्र: 13 अप्रैल
बैसाखी के अवसर पर 13 अप्रैल को एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून से संबंधित विधेयक पर चर्चा हुई और उसे पारित किया गया।
3. दूसरा विशेष सत्र: 1 मई
मजदूर दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार का बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी के 88 विधायकों के समर्थन से प्रस्ताव पारित हुआ।
इसी दिन सरकार ने न्यूनतम दैनिक मजदूरी 483 रुपये से बढ़ाकर 555.45 रुपये करने की घोषणा भी की।
4. मानसून सत्र: 3 से 10 अगस्त
अगस्त में आयोजित मानसून सत्र के दौरान विधायी कामकाज किया गया। अंतिम दिन नौ विधेयक पारित किए गए। इनमें कर व्यवस्था, कर्मचारियों से जुड़े प्रावधान, पेड़ों के संरक्षण और निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित विधेयक शामिल थे।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के आसार
22 से 27 अक्टूबर तक चलने वाले विशेष सत्र में किसानों, कर्मचारियों और बेअदबी कानून से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्ष सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठा सकता है, जबकि सत्ता पक्ष केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने की कोशिश कर सकता है।
सत्र की वास्तविक कार्यसूची, प्रस्तावों और विधायी कामकाज की स्थिति सदन की आधिकारिक घोषणा तथा कार्यवाही से स्पष्ट होगी।

