अमन अरोड़ा का कांग्रेस पर हमला, बोले- सत्ता में आई तो मुफ्त बिजली, महिला सहायता और 10 लाख का हेल्थ कवर बंद कर सकती है
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुफ्त सुविधाओं और सरकारी सब्सिडी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आप पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यदि पार्टी सत्ता में आती है, तो मुफ्त बिजली, महिलाओं को वित्तीय सहायता और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मिलने वाला 10 लाख रुपये का हेल्थ कवर बंद किया जा सकता है।
अमन अरोड़ा ने कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के सब्सिडी संबंधी बयान पर सवाल उठाते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से स्पष्ट करने को कहा कि सत्ता में आने पर इन योजनाओं को जारी रखा जाएगा या नहीं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन सभी योजनाओं को बंद करने की औपचारिक घोषणा का उल्लेख नहीं है। अरोड़ा के बयान में लगाए गए आरोप आम आदमी पार्टी का राजनीतिक पक्ष हैं।
बिजली सब्सिडी और महिलाओं की सहायता पर कांग्रेस से मांगा जवाब
चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमन अरोड़ा ने कहा कि राजा वड़िंग के उस बयान से कांग्रेस की नीतियों को लेकर सवाल उठे हैं, जिसमें जरूरत के आधार पर सब्सिडी देने की बात कही गई थी।
अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर मौजूदा जनकल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी या उनमें बदलाव किया जाएगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योगों को बिजली सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की योजना का भी जिक्र किया।
10 लाख रुपये के हेल्थ कवर पर भी उठाए सवाल
अमन अरोड़ा ने कांग्रेस से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मिलने वाले 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य कवर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानना चाहिए कि कांग्रेस सत्ता में आने पर इस सुविधा को जारी रखेगी या नहीं।
अरोड़ा ने बंद किए गए टोल प्लाजा, नहर के पानी और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियां लागू होने पर इन सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।
आप नेता ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रताप सिंह बाजवा सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
‘कांग्रेस नेता खुद क्यों नहीं छोड़ते सब्सिडी?’
अमन अरोड़ा ने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि यदि वे जरूरत के आधार पर सब्सिडी देने के पक्ष में हैं, तो क्या वे स्वयं और उनके परिवार सरकारी सुविधाओं का लाभ छोड़ने के लिए तैयार हैं?
उन्होंने दावा किया कि आप सरकार के कार्यकाल में मुफ्त बिजली और महिलाओं की वित्तीय सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। अरोड़ा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस के पुराने कार्यकाल का भी किया जिक्र
अमन अरोड़ा ने कांग्रेस के पुराने शासनकाल का उल्लेख करते हुए किसानों को मुफ्त बिजली देने की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2002 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद किसानों की मुफ्त बिजली बंद की गई थी और करीब ढाई साल बाद इसे फिर शुरू किया गया।
उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले मुफ्त बिजली जारी रखने के वादे का भी जिक्र किया और कहा कि मतदाताओं को राजनीतिक दलों के चुनावी वादों के साथ उनके पिछले रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना चाहिए।
ये दावे अमन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए। इन पर कांग्रेस का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
टोल प्लाजा और नहर के पानी पर शुल्क लगाने की आशंका जताई
अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता में आई तो टोल प्लाजा दोबारा शुरू किए जा सकते हैं, खेतों तक नहर के पानी की पहुंच पर शुल्क लगाया जा सकता है और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर बंद किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर कांग्रेस को जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। हालांकि, ये संभावित फैसलों को लेकर आप नेता की आशंकाएं हैं, न कि कांग्रेस की ओर से घोषित नीतियां।
2027 चुनाव से पहले कल्याणकारी योजनाओं पर सियासी बहस तेज
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले मुफ्त बिजली, महिलाओं की वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य बीमा और सब्सिडी का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। आम आदमी पार्टी इन योजनाओं को अपनी सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है, जबकि राजा वड़िंग के जरूरत के आधार पर सब्सिडी देने संबंधी बयान को लेकर दोनों दलों के बीच विवाद बढ़ा है।
अब इस मामले में कांग्रेस के जवाब और योजनाओं को लेकर उसकी आधिकारिक नीति पर नजर रहेगी।

