पूर्व कांग्रेस विधायक रमिंदर आवला अकाली दल में शामिल, राजा वड़िंग के टिकट वाले बयान से थे नाराज
पंजाब की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। फाजिल्का जिले के जलालाबाद से पूर्व कांग्रेस विधायक रमिंदर सिंह आवला रविवार, 25 अक्टूबर को शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। आवला के इस फैसले को पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान और आगामी चुनावों की राजनीतिक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, आवला के पार्टी बदलने के पीछे कई राजनीतिक पहलुओं की चर्चा है, जिनमें कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर उनकी कथित नाराजगी भी शामिल है।
सुखबीर बादल ने किया आवला का स्वागत
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने चंडीगढ़ में रमिंदर सिंह आवला को पार्टी में शामिल कराया। इस मौके पर अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमबंस सिंह बंटी रोमाणा भी मौजूद रहे।
सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आवला का पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जलालाबाद ने उन्हें तीन बार क्षेत्र की सेवा करने का अवसर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अकाली सरकारों के कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र में बड़े स्तर पर विकास कार्य करवाए गए थे।
आवला के अकाली दल में शामिल होने से जलालाबाद और फिरोजपुर क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है।
राजा वड़िंग के बयान से जुड़ी नाराजगी की चर्चा
रमिंदर सिंह आवला के कांग्रेस छोड़ने के फैसले को पार्टी में टिकट वितरण को लेकर हुई नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ समय पहले पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने परिवार के एक से अधिक सदस्यों को चुनावी टिकट देने के मुद्दे पर टिप्पणी की थी।
4 अगस्त को फिरोजपुर में एक जनसभा के दौरान वड़िंग ने कहा था कि पार्टी के कई बड़े नेता खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं और अपने बेटों के लिए भी टिकट मांगते हैं। उन्होंने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के संदर्भ में कहा था कि एक परिवार को दो टिकट नहीं दिए जाएंगे। इसी दौरान उन्होंने सवाल किया था, ”दो टिकट, बाप का राज है क्या?”
इस बयान को रमिंदर सिंह आवला से जोड़कर देखा गया था। हालांकि, आवला के पार्टी छोड़ने के फैसले के पीछे यही एकमात्र वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लोकसभा चुनाव में शेर सिंह घुबाया को टिकट देने पर भी हुआ था विवाद
फिरोजपुर में कांग्रेस के भीतर रमिंदर सिंह आवला और लोकसभा सांसद शेर सिंह घुबाया के बीच टिकट को लेकर पहले भी खींचतान की खबरें सामने आई थीं।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शेर सिंह घुबाया शिरोमणि अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद कांग्रेस में उन्हें फिरोजपुर से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति बनी थी। रमिंदर सिंह आवला समेत कुछ स्थानीय नेताओं की नाराजगी भी उस समय चर्चा में रही।
इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान ने शेर सिंह घुबाया को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया। इस घटनाक्रम को भी आवला और कांग्रेस नेतृत्व के बीच राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जाता रहा है।
अकाली दल के लिए कितनी अहम होगी आवला की एंट्री?
रमिंदर सिंह आवला का अकाली दल में शामिल होना सीमावर्ती फिरोजपुर क्षेत्र की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जलालाबाद में उनके राजनीतिक अनुभव और स्थानीय संपर्कों से अकाली दल को फायदा मिलने की संभावना है।
दूसरी ओर, उनके कांग्रेस छोड़ने से पार्टी के स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आवला की नई राजनीतिक पारी जलालाबाद में अकाली दल की स्थिति को कितना मजबूत करती है और आने वाले चुनावों में इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

