लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में महंगाई का असर अब दूध की कीमतों पर भी पड़ने जा रहा है। शहर में 1 नवंबर से दूध के दाम 3 रुपये प्रति किलो तक बढ़ाए जा रहे हैं। हैबोवाल और ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स के डेयरी संचालकों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। डेयरी प्रतिनिधियों के मुताबिक, पशुओं के चारे और फीड की कीमतें बढ़ने के कारण दूध के पुराने रेट पर कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।
हैबोवाल डेयरी के प्रधान कुलदीप सिंह लहरिया और अन्य डेयरी प्रतिनिधियों ने नए रेट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शहर में दूध बेचने वाले बूथों पर प्रति किलो 3 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं, क्रीम डेयरी संचालकों के लिए फैट के रेट में 30 पैसे की वृद्धि की गई है।
1 नवंबर से लागू होंगे नए रेट
डेयरी संचालकों के अनुसार, दूध की कीमतों में बढ़ोतरी 1 नवंबर से लागू होगी। उन्होंने सभी डेयरी मालिकों से नए रेट अपनाने की अपील की है।
इस फैसले का सीधा असर लुधियाना के उन परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है, जो रोजाना दूध खरीदते हैं। त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों में होने वाली यह बढ़ोतरी आम लोगों के खर्च को और बढ़ा सकती है।
पशुओं का चारा महंगा होना मुख्य वजह
डेयरी प्रतिनिधियों ने दूध के दाम बढ़ाने के पीछे पशुओं के चारे की बढ़ती कीमतों को प्रमुख कारण बताया है। उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय में तूड़ी, दाना और हरे चारे यानी पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले हरे चारे की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
डेयरी संचालकों का कहना है कि चारे और फीड पर खर्च बढ़ने से पशुपालन की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में पुराने रेट पर दूध बेचकर खर्च निकालना और परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा है।
‘दाम नहीं बढ़ाए तो डेयरी बेचनी पड़ेगी’
डेयरी प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़ती लागत के कारण कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनके अनुसार, कई डेयरी मालिक घाटे और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और कुछ को अपना कारोबार बेचने तक की नौबत आ रही है।
डेयरी संचालकों ने चेतावनी दी कि यदि दूध की कीमतों में लागत के हिसाब से बढ़ोतरी नहीं की गई, तो कारोबार चलाना और मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि नए रेट लागू करना डेयरी व्यवसाय को जारी रखने के लिए जरूरी हो गया है।
आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर
1 नवंबर से दूध की कीमतों में 3 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी होने से लुधियाना के उपभोक्ताओं को अब दूध खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे। वहीं, डेयरी संचालकों का तर्क है कि चारे और पशुपालन की लागत बढ़ने के कारण कीमतों में बदलाव जरूरी था।
अब देखना होगा कि दूध के नए रेट लागू होने के बाद शहर के उपभोक्ताओं और डेयरी कारोबार पर इसका कितना असर पड़ता है।

