झोटा के पिता ने राहुल गांधी से मिलने से किया इनकार, रवनीत बिट्टू को भी धरने में न आने की अपील
मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर चल रहे धरने में राजनीतिक नेताओं की एंट्री को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। झोटा के पिता भीम सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से धरनास्थल के आसपास भी नहीं आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी धरने में पहुंचे तो उन्हें पंथ से निष्कासित किए जाने का डर है।
सोमवार को धरने के मंच से संबोधित करते हुए भीम सिंह ने कहा कि उनका राहुल गांधी या पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के परिवार से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं है। उन्होंने दोनों परिवारों से अपील की कि वे धरनास्थल के आसपास न आएं।
इससे पहले वह भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से भी धरनास्थल पर नहीं आने की अपील कर चुके हैं। चर्चा थी कि राहुल गांधी परविंदर सिंह झोटा के परिवार और धरने को समर्थन देने के लिए मानसा पहुंच सकते हैं। इसी बीच भीम सिंह का यह बयान सामने आया है।
बोले- मेरी आस्था श्री अकाल तख्त साहिब से जुड़ी है
भीम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें जो सम्मान और पहचान मिली है, वह पंथ और सिख धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने गुरु नानक देव जी, गुरु गोबिंद सिंह जी, अकाली बाबा फूला सिंह और बाबा दीप सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपनी धार्मिक आस्था का अपमान नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि उनकी और उनके परिवार की आस्था श्री अकाल तख्त साहिब से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि राहुल गांधी या बेअंत सिंह के परिवार का कोई सदस्य धरने के पास आता है तो उन्हें पंथ से निष्कासित किए जाने या तनखैया घोषित होने का डर है।
हत्या के 21 दिन बाद कृषि मंत्री पहुंचे झोटा के घर
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के करीब 21 दिन बाद सोमवार को पंजाब सरकार के मंत्री उनके परिवार से मिलने पहुंचे। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने झोटा के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान सरदूलगढ़ के विधायक गुरप्रीत सिंह बनावाली भी उनके साथ मौजूद रहे।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को एक केमिस्ट द्वारा परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया था। परिवार की मांग पर इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है।
हालांकि, परिवार और इंसाफ कमेटी का धरना अभी जारी है। परिजन मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। झोटा के शव का पोस्टमॉर्टम भी अब तक नहीं हुआ है और उनका शव सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया है।
इंसाफ कमेटी की ये मांगें अब भी लंबित
परविंदर सिंह झोटा के परिवार और इंसाफ कमेटी की ओर से कई मांगें अभी भी उठाई जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- मुख्यमंत्री का इस्तीफा: कमेटी कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रही है।
- DGP का इस्तीफा: परिवार और कमेटी पंजाब के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- SSP पर कार्रवाई: मानसा के SSP वैभव चौधरी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
- प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द करना: कमेटी 13 अक्टूबर के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की मांग कर रही है।
- झोटा और उनके साथियों के खिलाफ मामले खत्म करना: कमेटी चाहती है कि परविंदर सिंह झोटा और उनके साथियों पर दर्ज मामलों को पूरी तरह रद्द किया जाए।
- पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई: कमेटी तीन पुलिस अधिकारियों को केवल निलंबित किए जाने से संतुष्ट नहीं है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहती है।
- सरकारी नोटिफिकेशन जारी करना: कमेटी का कहना है कि जिन 12 मांगों को स्वीकार किए जाने की बात कही गई है, उन पर औपचारिक सरकारी आदेश जारी किए जाएं।
फिलहाल भीम सिंह की राजनीतिक नेताओं से धरने से दूर रहने की अपील और परिवार की लंबित मांगों के चलते मानसा में जारी मोर्चा चर्चा में है। अब सरकार की ओर से अगला कदम क्या उठाया जाता है, इस पर नजर बनी हुई है।

