पंजाब में 1,597 सरकारी महिला कर्मचारियों ने लिया मावां-धीयां योजना का लाभ, होगी वसूली

पंजाब में 1,597 सरकारी महिला कर्मचारियों ने लिया मावां-धीयां योजना का लाभ, अब होगी राशि की वसूली

पंजाब में मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। जांच में 1,597 ऐसी महिलाओं की पहचान हुई है, जो नियमित सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद योजना के तहत हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही थीं। योजना के नियमों के अनुसार, ये महिलाएं लाभ लेने के लिए पात्र नहीं हैं।

अब पंजाब सरकार इन महिलाओं के नाम लाभार्थियों की सूची से हटाने और उनसे अब तक मिली सहायता राशि वापस लेने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, यदि जांच में गलत जानकारी देकर लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास निदेशालय ने 30 अक्टूबर को सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को पत्र जारी किया है। इसमें संबंधित महिला कर्मचारियों की नौकरी, सेवा रिकॉर्ड और सेवानिवृत्ति से जुड़ी जानकारी की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

कैसे पकड़ी गईं 1,597 महिला कर्मचारी?

सरकार ने योजना के लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान इंटीग्रेटेड ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी कर्मचारियों के डेटा से किया। इस जांच के दौरान 1,597 ऐसी महिलाओं की पहचान हुई, जो सरकारी सेवा में होने के बावजूद योजना का लाभ ले रही थीं।

योजना के नियमों के अनुसार, वर्तमान और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, सांसद और विधायक इसके लिए पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद कुछ महिलाओं ने आवेदन के दौरान अपनी सरकारी नौकरी से संबंधित जानकारी नहीं दी।

शुरुआती वेरिफिकेशन में कैसे रह गई चूक?

योजना की शुरुआत में आंगनवाड़ी केंद्रों और सेवा केंद्रों के माध्यम से बड़े स्तर पर पंजीकरण किया गया था। आवेदन प्रक्रिया तेजी से पूरी करने और लाभार्थियों को सीधे बैंक खातों में DBT के जरिए राशि भेजने के दौरान सभी आवेदकों का विस्तृत सत्यापन शुरुआती चरण में नहीं हो सका।

बाद में जब सरकार ने लाभार्थियों के रिकॉर्ड का HRMS डेटाबेस से मिलान किया, तब अपात्र सरकारी महिला कर्मचारियों की पहचान सामने आई।

महिला कर्मचारियों से मांगा जाएगा लिखित जवाब

निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर सुखदीप सिंह झज्ज के मुताबिक, HRMS के जरिए इन महिला कर्मचारियों की पहचान की गई है। अब संबंधित विभागों की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर लिखित जवाब मांगा जाएगा।

विभागों को प्रत्येक कर्मचारी की वर्तमान नौकरी की स्थिति, सेवा रिकॉर्ड, सेवानिवृत्ति और पेंशन से जुड़ी जानकारी की जांच करनी होगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित महिला योजना की पात्रता शर्तों के तहत लाभ लेने की हकदार थी या नहीं।

अपात्र पाए जाने पर पूरी राशि की होगी वसूली

निदेशालय ने विभागों को निर्देश दिया है कि जांच में अपात्र पाए जाने वाली महिलाओं से योजना के तहत प्राप्त आर्थिक सहायता की राशि लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वसूल की जाए।

इसके साथ ही, जिन मामलों में गलत जानकारी देने या सरकारी नौकरी से जुड़े तथ्य छिपाकर लाभ लेने की पुष्टि होगी, उनमें संबंधित सेवा नियमों के तहत प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

विभागों को कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश

निदेशालय ने सभी संबंधित विभागों से जांच और कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में कर्मचारियों से मिले जवाब, अपात्र घोषित लाभार्थियों की संख्या, उन्हें दी गई कुल सहायता राशि, वसूली गई रकम और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण शामिल करना होगा।

फिलहाल 1,597 महिला कर्मचारियों की पहचान होने के बाद उनके मामलों की विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अंतिम कार्रवाई जांच और कर्मचारियों के जवाब के आधार पर तय होगी।

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