CM मान के स्पष्टीकरण पर क्या बोले जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज? प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही बड़ी बातें

पंजाब डेस्क:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज अपने स्पष्टीकरण के लिए श्री अकाल तख़्त साहिब पहुंचे। एक आपत्तिजनक वीडियो, गोलक और अन्य सिख धार्मिक मुद्दों को लेकर दिए गए बयानों के संदर्भ में श्री अकाल तख़्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मुख्यमंत्री को तलब किया था। आज मुख्यमंत्री मान ने अकाल तख़्त साहिब के सचिवालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।

मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद श्री अकाल तख़्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। जत्थेदार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने गोलक से जुड़े मामले सहित सभी बिंदुओं पर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है, जिसे अकाल तख़्त ने संज्ञान में लिया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर आने वाले दिनों में पांचों सिंह साहिबानों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगे का निर्णय लिया जाएगा।

जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यह श्री अकाल तख़्त साहिब है, जहां सबको झुकना ही होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि अकाल तख़्त किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कोई बैर नहीं रखता और हर मामले को सिख मर्यादाओं व परंपराओं के अनुरूप ही देखा जाता है।

प्रेस वार्ता के दौरान जत्थेदार ने बताया कि मुख्यमंत्री से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर भी चर्चा हुई है। इस मामले में मुख्यमंत्री से संबंधित दो लैब की जानकारी देने को कहा गया है, ताकि तथ्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके।

जत्थेदार ने आगे बताया कि पूरी बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। मुख्यमंत्री ने सिख सिद्धांतों और मर्यादाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए स्वीकार किया कि कुछ विषयों पर उन्हें इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सिख मर्यादा और सिद्धांतों की पूरी जानकारी नहीं थी और भविष्य में वे ऐसे संवेदनशील विषयों पर कोई बयान नहीं देंगे।

इस दौरान जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने 328 पावन स्वरूपों से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “169 स्वरूप बरामद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल सिख मर्यादा के खिलाफ है। पावन स्वरूपों के संदर्भ में “लापता” या “बरामद” जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई गुरुद्वारों और घरों में पावन स्वरूप स्थापित हैं और रसीद न होने का अर्थ यह नहीं कि वे अनधिकृत हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान आज करीब 11 बजे श्री अकाल तख़्त साहिब सचिवालय में पेश हुए थे। इससे पहले उन्होंने नंगे पांव, नजरें झुकाकर श्री दरबार साहिब में माथा टेका। अमृतधारी सिख न होने के कारण मुख्यमंत्री ने अकाल तख़्त की फसील के भीतर जाने की बजाय सचिवालय में ही अपना स्पष्टीकरण दिया। इस दौरान वे अपने साथ दो काले रंग के बैग भी लेकर पहुंचे थे।

 

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