पंजाब सरकार की और से शहरों की खूबसूरती और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्री संजीव अरोड़ा ने निर्देश जारी किए हैं कि शहरों के पुलिस थानों,ट्रैफिक यार्डों और सरकारी जमीनों पर सालों से धूल फांक रहे पुराने,लावारिस और जब्त वाहनों को 30 दिनों के भीतर शहर की सीमा से बाहर निर्धारित यार्डों में शिफ्ट किया जाए।
30 दिन का अल्टीमेटम: संयुक्त टीमें करेंगी सर्वे
मंत्री संजीव अरोड़ा ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान समयबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। इसके लिए पुलिस विभाग नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें पहले सर्वे कर वाहनों की लिस्ट तैयार करेंगी और फिर उन्हें शहर के बाहर ले जाया जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?
शहर के बीचों-बीच वाहनों का अंबार कई समस्याओं की जड़ बना हुआ था पुराने वाहनों में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर और चूहे पनपते हैं,जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ता है। वाहनों में बचे हुए ईंधन और पुराने इलेक्ट्रिकल पार्ट्स के कारण घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आग लगने का खतरा बना रहता है। सड़कों के किनारे खड़े ये वाहन ट्रैफिक जाम का कारण बनते हैं और शहर की सुंदरता बिगाड़ते हैं। जर्जर हो चुके वाहनों से निकलने वाला केमिकल और तेल जमीन और पानी को प्रदूषित कर रहा है।
आम जनता और वाहन मालिकों के लिए क्या है खास?
सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं और कहा है की वाहन हटाने से पहले उसकी फोटो ली जाएगी और उस पर नोटिस चिपका दिया जाएगा। अगर वाहन का मालिक मिल जाता है तो उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अपना वाहन ले जाने का मौका दिया जाएगा। वही जो वाहन किसी केस में जब्त हैं, उन्हें शिफ्ट करते समय पूरी कानूनी कागजी कार्रवाई की जाएगी ताकि अदालती कार्यवाही पर असर न पड़े।
वही स्थानीय निकाय मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा शहर की जमीन एक कीमती संसाधन है जिसका उपयोग जनता की भलाई के लिए होना चाहिए न कि कूड़ा डंप करने के लिए। यह कदम पंजाब के शहरों को स्वच्छ सुरक्षित और बेहतर बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
नियमों का होगा कड़ाई से पालन
यह पूरी कार्रवाई मोटर वाहन अधिनियम 1988 और ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के तहत की जा रही है। हटाए गए वाहनों को केवल अधिकृत स्क्रैप यार्ड और रीसाइक्लिंग केंद्रों पर ही भेजा जाएगा ताकि प्रदूषण न फैले।

