हरियाणा में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर जारी किए गए सरकारी सर्कुलर एक नए कानूनी विवाद में फंस गए हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील हेमंत कुमार ने राज्यपाल असीम घोष और मुख्यमंत्री नायब सैनी को लिखित शिकायत भेजकर 19 और 23 जनवरी को जारी सर्कुलर की शब्दावली पर गंभीर आपत्ति जताई है।
इसमें मुख्य विवाद ‘ध्वजारोहण’ (Flag Hoisting) और ‘ध्वज फहराने’ (Flag Unfurling) के तकनीकी अंतर को लेकर है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि सरकार ने गणतंत्र दिवस के लिए जारी आधिकारिक पत्र में ‘ध्वजारोहण’ शब्द का उपयोग किया है, जो संवैधानिक रूप से केवल 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के लिए आरक्षित है। इसके अलावा, राज्य-स्तरीय समारोह के आधिकारिक उल्लेख को लेकर भी सरकार की अधिसूचना पर सवाल उठाए गए हैं।

संवैधानिक मर्यादा: 15 अगस्त और 26 जनवरी के झंडा फहराने में अंतर
शिकायतकर्ता वकील हेमंत कुमार ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि 26 जनवरी और 15 अगस्त के कार्यक्रमों में ध्वज फहराने की प्रक्रिया पूरी तरह अलग होती है। इसमें सरकार के सर्कुलर में दोनों शब्दों का घालमेल किया गया है, जिसे कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया गया है।
- ध्वजारोहण (Flag Hoisting): यह 15 अगस्त को होता है। इसमें तिरंगा नीचे से ऊपर की ओर खींचकर फहराया जाता है, जो देश की आजादी और नए उदय का प्रतीक है।
- ध्वज फहराना (Flag Unfurling): यह 26 जनवरी को होता है। इसमें तिरंगा पोल के ऊपर ही बंधा होता है, जिसे खोलकर फहराया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि भारत पहले से ही एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक गणतंत्र है।
राज्य-स्तरीय समारोह और मुख्यमंत्री की उपस्थिति पर सवाल
शिकायतकर्ता हेमंत कुमार ने सरकारी सर्कुलर में राज्य-स्तरीय समारोह के आयोजन को लेकर भी प्रशासनिक चूक की बात कही गई है।
- आधिकारिक श्रेणी का अभाव: शिकायत के अनुसार, पंचकूला में होने वाले कार्यक्रम को जिसमें राज्यपाल प्रो. आसिम कुमार घोष झंडा फहराएंगे, सर्कुलर में औपचारिक रूप से ‘राज्य-स्तरीय समारोह’ नहीं लिखा गया है, जबकि जनसंपर्क विभाग के प्रेस नोट में इसे राज्य-स्तरीय बताया गया है।
- प्रोटोकॉल का उल्लंघन: वकील हेमंत ने तर्क दिया कि यदि पंचकूला का कार्यक्रम राज्य-स्तरीय है, तो मुख्यमंत्री नायब सैनी को गुरुग्राम जाने के बजाय पंचकूला में राज्यपाल की अगवानी करनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे नई दिल्ली के राजपथ पर प्रधानमंत्री हमेशा राष्ट्रपति का स्वागत करते हैं, वही परंपरा राज्यों में भी लागू होनी चाहिए।

