पंजाब में 65 हजार आउटसोर्स कर्मचारी होंगे रेगुलर, मान सरकार ने खत्म की ठेकेदारी व्यवस्था
चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी आधारित रोजगार व्यवस्था में व्यापक बदलाव का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी नियंत्रण के तहत लाने और चरणबद्ध तरीके से नियमित करने की नीति को मंजूरी दी गई।
सरकार के अनुसार, इस फैसले का लाभ 51 विभागों में कार्यरत करीब 65 हजार कर्मचारियों को मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत निजी ठेकेदारों और बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर कर्मचारियों को सीधे सरकारी ढांचे से जोड़ा जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा नियमितीकरण
नई नीति के अनुसार, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी श्रेणी के ऐसे कर्मचारी जिन्होंने निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर ली है, उन्हें पहले सीधे सरकारी अनुबंध व्यवस्था के तहत शामिल किया जाएगा। इसके बाद तय शर्तों और उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर उन्हें नियमित नियुक्ति का अवसर दिया जाएगा।
सरकार ने जोखिम भरे कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान भी किए हैं। फायर सर्विस, बिजली वितरण, सीवर और स्वच्छता सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम सेवा अवधि में इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
इन विभागों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव बिजली, स्थानीय निकाय, सहकारी संस्थाएं, स्कूल शिक्षा और परिवहन विभागों पर पड़ेगा, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, लोक निर्माण, कृषि, जेल, तकनीकी शिक्षा और मेडिकल शिक्षा विभागों के कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिलेगा।
वेतन सीधे खाते में, छुट्टियों की सुविधा भी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। इससे किसी भी प्रकार की अनावश्यक कटौती या मध्यस्थों की भूमिका समाप्त होगी।
इसके साथ ही कर्मचारियों को निर्धारित अवकाश, प्रसूति लाभ और अन्य सेवा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सेवा सुरक्षा पर भी जोर
नई नीति में कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार का कहना है कि किसी भी कर्मचारी को उचित कारण और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सेवा से नहीं हटाया जा सकेगा। इसके लिए स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
डीए और पेंशन बकाए पर बनेगी रणनीति
मंत्रिमंडल ने कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े लंबित वित्तीय मामलों के समाधान के लिए एक विशेष समिति के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी है। यह समिति वेतन संशोधन, महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत और अन्य बकाया मामलों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
भ्रष्टाचार मामलों के लिए बनेंगी विशेष अदालतें
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सात विशेष अदालतें स्थापित करने की भी मंजूरी दी है। इन अदालतों के माध्यम से भ्रष्टाचार निवारण कानून के अंतर्गत दर्ज मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जाएगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के हितों की रक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा जहां ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त कर कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान किया जा रहा है।

