पंजाब कांग्रेस को लेकर दिल्ली में आज बनेगी नई रणनीति, 3 दिन तक नेताओं से फीडबैक लेंगे ऑब्जर्वर
चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस की सियासत को लेकर आज (16 जून) दिल्ली में अहम मंथन शुरू होगा। कांग्रेस हाईकमान द्वारा नियुक्त तीनों ऑब्जर्वर अगले तीन दिनों तक पंजाब के नेताओं से मुलाकात कर फीडबैक लेंगे। इसके बाद वे अपनी विस्तृत रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेंगे, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पार्टी वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। ऐसे में पंजाब कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व में संभावित बदलावों को लेकर यह कवायद काफी अहम मानी जा रही है।
पंजाब कांग्रेस में बदलाव की अटकलें तेज
पिछले कुछ समय से पंजाब कांग्रेस के भीतर प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता के पदों में बदलाव की चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में ऑब्जर्वरों की रिपोर्ट का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि हाईकमान फीडबैक के आधार पर संगठनात्मक फेरबदल पर भी फैसला ले सकता है।
गुटबाजी खत्म करने के लिए गठित किया गया पैनल
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के उद्देश्य से कांग्रेस हाईकमान ने 11 जून को बड़ा कदम उठाया था।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद तीन वरिष्ठ नेताओं—
- अजय माकन
- मीनाक्षी नटराजन
- भजन लाल जाटव
को पंजाब का ऑब्जर्वर नियुक्त किया था।
इन ऑब्जर्वरों को पंजाब कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का आकलन कर नेताओं से फीडबैक लेने और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तीन दिन तक होगी वन-टू-वन बैठकें
तीन सदस्यीय पैनल ने दिल्ली में सांसदों, मौजूदा और पूर्व विधायकों तथा जिला अध्यक्षों के साथ तीन दिवसीय वन-टू-वन (आमने-सामने) बैठकें तय की हैं।
पहले दिन सात सांसदों से मुलाकात की जाएगी। इसके बाद विधायकों, पूर्व विधायकों और जिला अध्यक्षों से अलग-अलग बातचीत कर संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर राय ली जाएगी।
2027 चुनाव पर फोकस
कांग्रेस हाईकमान पंजाब में पार्टी को दोबारा मजबूत करने और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर गंभीर नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली ये बैठकें पंजाब कांग्रेस के भविष्य, संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

