लुधियाना: पंजाब के लुधियाना शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। स्थानीय अदालत ने लुधियाना सिटी बस सर्विसेज लिमिटेड (LCBSL) की 120 जेएनएनयूआरएम (JNNURM) बसों को कुर्क करने और उनकी नीलामी करने के आदेश जारी किए हैं। इस फैसले के बाद शहर में संचालित सिटी बस सेवा के प्रभावित होने और सीमित बस संचालन के पूरी तरह ठप पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, अदालत की ओर से नीलामी से संबंधित नोटिस जारी कर 2 जुलाई 2026 को बसों की नीलामी की तारीख तय की गई है। साथ ही संबंधित कार्रवाई की रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में पेश करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद लुधियाना सिटी बस सर्विसेज लिमिटेड और एक निजी बस ऑपरेटर कंपनी के बीच लंबे समय से चल रहा है। निजी कंपनी का आरोप है कि डीजल की कीमतों और परिचालन लागत में वृद्धि के बावजूद बस किराए में संशोधन नहीं किया गया, जिससे उसे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
मामला मध्यस्थता प्रक्रिया तक पहुंचा, जिसके बाद जनवरी 2024 में अदालत ने निजी कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लगभग 6.88 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए थे।
अदालत के आदेश के बाद बढ़ी मुश्किलें
सूत्रों के अनुसार, इस फैसले के खिलाफ कानूनी राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख भी किया गया था। अदालत ने मुआवजा राशि के एक हिस्से को नकद और शेष को सुरक्षा के रूप में जमा करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, निर्धारित शर्तों का पूर्ण पालन नहीं होने के बाद अब बसों की कुर्की और नीलामी की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
जनता पर पड़ सकता है असर
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो शहर में पहले से सीमित दायरे में संचालित सिटी बस सेवा गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर उन हजारों यात्रियों पर पड़ सकता है, जो रोजमर्रा के आवागमन के लिए सार्वजनिक बस सेवा पर निर्भर हैं।
निगम प्रशासन की प्रतिक्रिया
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि मामले की कानूनी स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही, यह प्रयास भी किया जाएगा कि शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित न हो और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, 2 जुलाई को प्रस्तावित नीलामी और उससे पहले होने वाली कानूनी गतिविधियों पर शहरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर लुधियाना की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के भविष्य पर पड़ सकता है।

