जालंधर: भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित विवादों में शामिल 2008 के ‘स्लैपगेट’ मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस घटना पर अफसोस जताते हुए इसे अपने करियर की सबसे बड़ी गलतियों में से एक बताया है।
हरभजन सिंह ने कहा कि मैदान पर हुआ वह घटनाक्रम नहीं होना चाहिए था और आज भी जब वह उस पल को याद करते हैं तो उन्हें दुख होता है। उन्होंने माना कि कुछ सेकेंड के गुस्से ने न केवल विवाद को जन्म दिया बल्कि उनकी सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुंचाया।
गलती स्वीकार करते हुए जताया पछतावा
पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि यदि उन्हें अपने जीवन की किसी एक गलती को सुधारने का अवसर मिले, तो वह इसी घटना को चुनेंगे। उनके अनुसार, खेल के मैदान पर खिलाड़ियों को संयम और खेल भावना बनाए रखनी चाहिए।
फिर चर्चा में आया पुराना विवाद
यह मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत ने एक इंटरव्यू में पुराने विवाद का उल्लेख करते हुए हरभजन सिंह को बॉक्सिंग रिंग में मुकाबले की चुनौती दी। उन्होंने कुछ पुराने प्रचार अभियानों और घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
हालांकि, इस चुनौती को लेकर हरभजन सिंह की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या था 2008 का विवाद?
आईपीएल के पहले सीजन में मुंबई और पंजाब के बीच खेले गए मुकाबले के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच विवाद हुआ था। घटना के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था और क्रिकेट जगत में काफी विवाद पैदा हुआ था।
उस समय संबंधित क्रिकेट अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की गई थी और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई थी।
खेल भावना पर फिर शुरू हुई बहस
हरभजन सिंह के हालिया बयान और श्रीसंत की प्रतिक्रिया के बाद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खेल भावना, खिलाड़ियों के व्यवहार और पेशेवर खेलों में अनुशासन को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों पुराने विवादों से सीख लेते हुए खिलाड़ियों को युवा पीढ़ी के लिए सकारात्मक उदाहरण पेश करना चाहिए।

