चंडीगढ़: केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू एक विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में बुधवार को पंजाब अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष पेश हुए। सुनवाई के दौरान आयोग ने उनका पक्ष सुना और मामले पर विचार करने के बाद उन्हें चार प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाकर श्रद्धा व्यक्त करने की सलाह दी।
मामला उस बयान से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों के संबंध में आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इस घटना के बाद मामला चर्चा में आया और आयोग ने इसका संज्ञान लिया था।
आयोग के समक्ष रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान रवनीत बिट्टू ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि घटना के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था और संबंधित वीडियो भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय परिस्थितियां तनावपूर्ण थीं और वह भावनात्मक रूप से प्रभावित हो गए थे।
चार धार्मिक स्थलों पर जाने की सलाह
आयोग की ओर से उन्हें पंजाब के विभिन्न प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाकर श्रद्धा व्यक्त करने और आशीर्वाद लेने की सलाह दी गई। आयोग ने कहा कि सामाजिक सौहार्द और सम्मानजनक संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
विवाद कैसे शुरू हुआ
यह विवाद स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान एक राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सामने आया था। उस दौरान पुलिस और राजनीतिक नेताओं के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से प्रतिक्रियाएं आई थीं।
पहले भी हो चुकी थी सुनवाई
मामले में आयोग द्वारा पहले भी सुनवाई की जा चुकी थी। व्यस्तताओं के कारण केंद्रीय मंत्री पूर्व निर्धारित तारीखों पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके थे। बाद में नई तारीख तय की गई, जिस पर वह आयोग के समक्ष उपस्थित हुए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
आयोग की इस कार्रवाई के बाद पंजाब के राजनीतिक हलकों में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के बयानों और आचरण को लेकर संवेदनशीलता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
फिलहाल आयोग द्वारा मामले में दी गई सलाह और केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा जारी है।

