लॉरेंस बिश्नोई पर अमेरिका में मर्डर केस: FBI की चार्जशीट में निज्जर हत्या का आरोप, गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर का इनाम
जालंधर: अमेरिका ने पहली बार कनाडा में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा करते हुए फेडरल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। अमेरिकी न्याय विभाग का दावा है कि 18 जून 2023 को हुई इस हत्या का आदेश भारतीय जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और फरार गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने दिया था।
यह कार्रवाई अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत की गई है।
ऑपरेशन हार्ड बॉल में बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में अब तक:
- 37 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
- 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
- 10 फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
- गोल्डी बराड़ पर 50 हजार अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की गई है।
चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई के अलावा जग्गू भगवानपुरिया, सुखराज सिंह कंग और अन्य कथित अपराधियों के नाम भी शामिल हैं।
जेल से गैंग चलाने का आरोप
अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई भारतीय जेल में रहते हुए भी मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) डिवाइस के जरिए अपने अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क का संचालन करता था। चार्जशीट के अनुसार, उसके गिरोह पर हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स तस्करी और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों को निर्देशित करने के आरोप हैं।
निज्जर हत्या का दावा
अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया है कि कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने रची थी। हालांकि, यह आरोप अमेरिकी जांच एजेंसियों की चार्जशीट का हिस्सा हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी होना बाकी है।
भारत सरकार का नहीं किया गया उल्लेख
चार्जशीट और अमेरिकी प्रेस रिलीज की महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें भारत सरकार, RAW, NIA या किसी भारतीय सरकारी अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। आरोप केवल कथित आपराधिक गिरोहों और उनके सदस्यों तक सीमित हैं।
रंगदारी और ड्रग्स नेटवर्क की जांच
अमेरिकी जांच के अनुसार, गिरोह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए रंगदारी मांगता था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स तस्करी तथा हथियारों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क का संचालन करता था।
क्या लॉरेंस को अमेरिका भेजा जाएगा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका भारतीय जेलों में बंद कुछ आरोपियों के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर सकता है। हालांकि भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत अंतिम निर्णय भारत सरकार करेगी।
यदि किसी आरोपी पर भारत में मुकदमा चल रहा हो या वह यहां सजा काट रहा हो, तो भारत उसे तत्काल अमेरिका भेजने के लिए बाध्य नहीं है। भारत अपनी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्यर्पण पर निर्णय ले सकता है।
पहले भी हो चुका है प्रत्यर्पण
भारत पहले भी अमेरिका को आरोपी सौंप चुका है। वर्ष 2025 में करीब 20 साल पुराने सड़क हादसे के मामले में गणेश शेनॉय का भारत से अमेरिका प्रत्यर्पण किया गया था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।

