रवनीत बिट्टू का दिलजीत दोसांझ पर हमला: बोले- पंजाब का दर्द बेच रहा बहुरूपिया, OTT विवाद को बताया पब्लिसिटी स्टंट
लुधियाना: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी हालिया फिल्म और OTT विवाद को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म को लेकर बिट्टू ने कहा कि यह पंजाब या सिख पंथ की सेवा नहीं, बल्कि “पैसा कमाने और प्रचार पाने की सोची-समझी रणनीति” है।
लुधियाना दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में बिट्टू ने दिलजीत को “बहुरूपिया” बताते हुए कहा कि वह जहां आर्थिक लाभ दिखाई देता है, वहीं अपना रुख बदल लेते हैं।
“जहां पैसा दिखता है, उधर चले जाते हैं”
रवनीत बिट्टू ने कहा कि विदेशों में दिलजीत कथित तौर पर खालिस्तान के झंडे लेकर आने वालों का विरोध करते हैं, जबकि दूसरी ओर पंजाब के दर्द पर फिल्में बनाकर खुद को अलग रूप में पेश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दोहरा रवैया है और इसका मकसद केवल आर्थिक लाभ कमाना है।
अमिताभ बच्चन का भी किया जिक्र
बिट्टू ने अभिनेता अमिताभ बच्चन का उल्लेख करते हुए कहा कि दिलजीत उन लोगों के प्रति सम्मान जताते रहे हैं, जिन पर 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए जाते रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में अब सिख समुदाय के दर्द की बात करना विरोधाभासी लगता है।
“महलों में बैठकर पंजाब का दर्द बता रहे”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिलजीत विदेशों में रहते हैं और आज पंजाब के संघर्ष की बात कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जब पंजाब कठिन दौर से गुजर रहा था, तब दिलजीत उस संघर्ष का हिस्सा नहीं थे।
‘चमकीला’ फिल्म पर भी उठाए सवाल
बिट्टू ने दिलजीत की फिल्म ‘चमकीला’ का भी उल्लेख किया और कहा कि यदि उन्हें सामाजिक मूल्यों की इतनी चिंता थी, तो उन्हें उस विषय पर फिल्म नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब खुद को समाज का प्रतिनिधि बताने की कोशिश की जा रही है।
OTT विवाद पर क्या बोले?
रवनीत बिट्टू ने दावा किया कि फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाया जाना किसी सरकारी दबाव का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक प्रचार रणनीति हो सकती है। उन्होंने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म अपने व्यावसायिक निर्णय स्वयं लेते हैं और सरकार का उन पर प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता।
बेअंत सिंह और जसवंत सिंह खालड़ा पर टिप्पणी
बिट्टू ने कहा कि उनके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के कार्यकाल में जसवंत सिंह खालड़ा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि खालड़ा के अपहरण की घटना बेअंत सिंह की हत्या के बाद हुई थी और ऐतिहासिक घटनाओं पर टिप्पणी करते समय तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
BJP नेताओं को भी दी सलाह
बिट्टू ने अपनी ही पार्टी के पंजाब नेताओं से कहा कि 1980 से 1995 के घटनाक्रम को लेकर भाजपा को अनावश्यक रूप से रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उस अवधि में न तो पंजाब और न ही केंद्र में भाजपा की सरकार थी, इसलिए पार्टी को तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए+7\77
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