पंजाबी दूरदर्शन | अमृतसर / दिल्ली
दिल्ली कैंट स्थित केंद्रीय विद्यालय में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब परीक्षा देने पहुंचे एक अमृतधारी छात्र को परीक्षा केंद्र में कृपाण (ककार) उतारने के लिए कहा गया। छात्र द्वारा धार्मिक आस्था के तहत धारण की गई कृपाण उतरवाए जाने के बाद यह मामला और अधिक गंभीर हो गया, जिससे सिख संगठनों में भारी रोष देखने को मिला।
घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के प्रधान Delhi Sikh Gurdwara Management Committee के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और जनरल सेक्रेटरी जगदीप सिंह काहलों के नेतृत्व में एजुकेशन सेल के चेयरमैन कुलतारण सिंह कोछड़ की टीम मौके पर पहुंची।
कमेटी पदाधिकारियों ने विद्यालय प्रशासन के कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई और सिख धार्मिक मर्यादाओं की जानकारी दी। हस्तक्षेप के बाद अमृतधारी छात्र को उसकी कृपाण वापस दिलवाई गई, जिस पर विद्यालय प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार की।
इस दौरान DSGMC पदाधिकारियों ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सिख गुरुओं और सिख परंपराओं के सम्मान की बात की जाती है, तब जमीनी स्तर पर कुछ अधिकारी सिख धर्म के मूल सिद्धांतों और पांच ककारों को लेकर अज्ञानता का परिचय देते हैं। उन्होंने इसे सिख धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।
कृपाण वापस मिलने के बाद छात्र और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली। छात्र के माता-पिता ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों का विशेष रूप से धन्यवाद किया और कहा कि समय पर हस्तक्षेप न होता तो मामला और गंभीर हो सकता था।
यह घटना एक बार फिर परीक्षा केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रताओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पंजाबी दूरदर्शन इस मामले से जुड़ी हर आगे की अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

