पठानकोट में 51वें दिन खत्म हुआ बुजुर्गों का धरना, टावर से उतरे

पठानकोट में 51वें दिन खत्म हुआ बुजुर्गों का टावर पर धरना, 200 फीट की ऊंचाई से सुरक्षित उतरे

पठानकोट: अपनी मांगों को लेकर करीब 50 दिनों से लगभग 200 फीट ऊंचे बिजली टावर पर बैठे दो बुजुर्ग आखिरकार मंगलवार को नीचे उतर आए। कुलविंदर सिंह (82) और शरम सिंह (85) ने धरने के 51वें दिन जिला प्रशासन के साथ बातचीत के बाद नीचे उतरने पर सहमति जताई। दोनों को सुरक्षित उतारने के लिए प्रशासन ने हाइड्रोलिक क्रेन की व्यवस्था की थी।

दोनों बुजुर्गों के नीचे आने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। अब उन्हें मेडिकल जांच के लिए सिविल अस्पताल ले जाने और फिर परिवार के साथ घर भेजने की प्रक्रिया की जानी थी।

रात में उतरने से किया इनकार, सुबह क्रेन से आए नीचे

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार देर शाम डीसी पल्लवी, एडीसी अर्शदीप सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद दोनों बुजुर्ग नीचे उतरने के लिए राजी हो गए थे। हालांकि, उन्होंने रात के समय उतरने से इनकार कर दिया।

बुजुर्गों ने बताया कि कई दिनों से टावर पर महज दो फीट के प्लेटफॉर्म पर रहने के कारण उनके घुटनों में परेशानी होने लगी थी। साथ ही, कम रोशनी में क्रेन की मदद से नीचे उतरना जोखिम भरा हो सकता था। इसलिए उन्होंने मंगलवार सुबह उजाला होने के बाद नीचे उतरने का फैसला किया।

पहले सिविल अस्पताल में होगी स्वास्थ्य जांच

टावर से नीचे उतरने के बाद दोनों बुजुर्गों की सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें सिविल अस्पताल ले जाने की योजना बनाई गई। करीब 50 दिनों तक ऊंचाई पर रहने के कारण उनकी मेडिकल जांच जरूरी मानी जा रही है। जांच के बाद उन्हें परिवार के सदस्यों के साथ घर भेजा जाना था।

अगले सप्ताह मुख्यमंत्री से बैठक कराने का आश्वासन

एडीसी अर्शदीप सिंह के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के साथ लंबे समय से बातचीत चल रही थी। प्रशासन ने बैराज औस्ती संघर्ष समिति को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगें सरकार के सामने रखी जाएंगी और अगले सप्ताह मुख्यमंत्री के साथ प्रभावित परिवारों की बैठक करवाने का प्रयास किया जाएगा।

समिति के अध्यक्ष दयाल सिंह ने बताया कि डीसी, एडीसी और बांध प्रशासन के अधिकारियों ने बुजुर्गों के साथ बातचीत की। अब प्रभावित परिवारों को प्रस्तावित बैठक से अपनी लंबित मांगों के समाधान की उम्मीद है।

33-34 साल पुराना है मामला

प्रशासन के मुताबिक, शाहपुरकंडी बैराज और डैम परियोजना से जुड़ा यह मामला करीब 33 से 34 साल पुराना है। एडीसी ने कहा कि इतने पुराने मामले का समाधान निकालने के लिए कानूनी पहलुओं और सरकारी नीतियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। प्रशासन ने बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की बात कही है।

धरने के दौरान सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का दावा

एडीसी के अनुसार, धरने के दौरान टावर के आसपास पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। बुजुर्गों के लिए रोशनी, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई थी। प्रशासन ने उन्हें नीचे उतारने के लिए हाइड्रोलिक क्रेन का इंतजाम किया।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो संघर्ष जारी रहेगा: समिति

बैराज औस्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष दयाल सिंह ने कहा कि प्रभावित परिवार करीब 34 वर्षों से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

दयाल सिंह के मुताबिक, समिति को मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने का आश्वासन मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस बार भी मांगों का उचित समाधान नहीं हुआ, तो संघर्ष जारी रखा जाएगा।

अब सबकी निगाहें अगले सप्ताह प्रस्तावित बैठक पर हैं। इससे यह स्पष्ट होगा कि दशकों से लंबित मांगों को लेकर सरकार और प्रभावित परिवारों के बीच कोई ठोस सहमति बन पाती है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *