केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने मंजूर किया; अब पंजाब विधानसभा चुनाव पर रहेगा फोकस
लुधियाना: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्र सरकार में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 24 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही पंजाब की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
रवनीत बिट्टू भाजपा की ओर से पंजाब से केंद्र सरकार में एकमात्र राज्य मंत्री थे। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अब उनका पूरा ध्यान 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव पर रहेगा।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दिया इस्तीफा
रवनीत बिट्टू ने 2024 का लोकसभा चुनाव लुधियाना से भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा था।
उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। इसके बाद भाजपा ने उनकी जगह तरुण चुघ को राज्यसभा भेज दिया। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सांसद न रहते हुए भी वे छह महीने तक मंत्री बने रह सकते थे, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।
बिट्टू बोले- अब मेरा समय पंजाब के लिए
इस्तीफे के बाद रवनीत बिट्टू ने कहा कि उन्होंने करीब दो-तीन महीने पहले ही पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जालंधर दौरे के दौरान भी उन्होंने इस विषय पर चर्चा की थी।
बिट्टू ने कहा कि राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के दिन ही उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उनका कहना है कि अब उनका पूरा समय पंजाब में पार्टी को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगेगा।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का जताया आभार
रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया मंच X पर जारी संदेश में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि भारत सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात रही।
उन्होंने कहा कि वह आगे भी राष्ट्र सेवा, जनसेवा और विकसित भारत के संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेंगे तथा पंजाब के लोगों की सेवा नए उत्साह के साथ जारी रखेंगे।
विधानसभा चुनाव पर टिकी निगाहें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफे के बाद रवनीत बिट्टू अब पंजाब में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

