लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा को ED का समन, CM भगवंत मान के कथित वायरल वीडियो की जांच से जुड़ा मामला
लुधियाना: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट मामले में लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा को समन जारी किया है। उन्हें 19 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ स्थित ED कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया है।
यह मामला पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित वायरल वीडियो की फोरेंसिक और साइबर जांच रिपोर्ट से जुड़ा है। पंजाब पुलिस की ओर से तैयार करवाई गई रिपोर्ट में वीडियो को AI से बनाया गया बताया गया था। अब इस रिपोर्ट को कथित तौर पर गलत तरीके से तैयार करवाने के आरोपों की जांच की जा रही है।
फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने को लेकर आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि स्वप्न शर्मा ने गुरुग्राम में कुछ विशेषज्ञों से मुलाकात की थी, ताकि वायरल वीडियो को AI जनरेटेड बताने वाली फोरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार कराई जा सके।
हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में स्वप्न शर्मा का पक्ष सामने आना बाकी है। ED के समन के बाद जांच में क्या जानकारी सामने आती है, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
जून में वायरल हुआ था भगवंत मान का कथित वीडियो
जून में सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो वायरल हुआ था। इसमें दावा किया गया था कि वीडियो में भगवंत मान सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़क रहे हैं। वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
इसके बाद भगवंत मान अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए थे। उन्होंने वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति के खुद होने से इनकार किया था और इसे AI की मदद से तैयार किया गया वीडियो बताया था।
गुरुग्राम पुलिस ने दो आरोपियों को किया था गिरफ्तार
इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने कथित फर्जी फोरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार करने की साजिश के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उनकी पहचान अरुण मेहरचंदू (25) और अंकित (25) के रूप में बताई गई है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद एक अन्य वीडियो भी सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर स्वप्न शर्मा गुरुग्राम में दो लोगों के साथ बैठे दिखाई दिए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने के लिए समझौता किया गया था।
ED की जांच पर टिकी नजरें
ED का समन इस मामले में आगे की जांच का हिस्सा है। फिलहाल, कथित फर्जी रिपोर्ट तैयार करने और इसमें संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच एजेंसियों की पड़ताल और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

