लुधियाना में 14 साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट, बिल्डर को ₹32.05 लाख लौटाने के आदेश; 12% ब्याज भी देना होगा
जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला, फीनिक्स इंफ्रा और दो निदेशकों पर ₹50 हजार का खर्च भी लगाया; 30 दिन में आदेश का पालन करना होगा
लुधियाना में फ्लैट बुक कराने के करीब 14 साल बाद भी कब्जा नहीं मिलने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिल्डर के खिलाफ फैसला सुनाया है। आयोग ने फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दो निदेशकों को शिकायतकर्ता के ₹32,05,634 लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जमा की गई रकम पर संबंधित भुगतान की तारीखों से लेकर रिफंड होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने कंपनी और दोनों निदेशकों पर संयुक्त रूप से ₹50,000 का खर्च भी लगाया है। आदेश के अनुसार, इसकी प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। मामले की सुनवाई 7 अक्टूबर को हुई थी।
2012 में बुक कराया था 1,350 वर्ग फुट का फ्लैट
फतेहगढ़ साहिब निवासी 66 वर्षीय मेजर सिंह सेखों ने 27 दिसंबर 2012 को लुधियाना के ड्रीम सिटी प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था। उन्होंने प्रोजेक्ट के ब्लॉक-एन में ग्राउंड फ्लोर पर 1,350 वर्ग फुट का फ्लैट लेने के लिए शुरुआत में ₹1.55 लाख जमा किए थे।
21 मई 2014 को हुए समझौते में फ्लैट की कुल कीमत ₹33.04 लाख तय की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2014 तक सात किस्तों में कुल ₹32,05,634 का भुगतान कर दिया था।
तय समय में नहीं मिला फ्लैट का कब्जा
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि समझौते के अनुसार बिल्डर को 24 महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा देना था। इसके लिए छह महीने की अतिरिक्त छूट अवधि भी निर्धारित की गई थी।
इसके बावजूद निर्धारित समय में निर्माण पूरा नहीं हुआ और उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने कई बार प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि 7 नवंबर 2022 को साइट पर जाने के दौरान भी उन्हें निर्माण कार्य होता दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने बिल्डर की शर्तों को बताया अनुचित
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने समझौते की शर्तों पर विचार किया। आयोग के अनुसार, समझौते की कुछ शर्तें बिल्डर के पक्ष में एकतरफा थीं और ऐसी अनुचित शर्तों को उपभोक्ता पर बाध्यकारी नहीं माना जा सकता।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित समय में फ्लैट का कब्जा नहीं देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फीनिक्स इंफ्रा और उसके दोनों निदेशकों ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष पेश नहीं किया। इसके बाद आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की।
AIPL और उसके एमडी के खिलाफ शिकायत खारिज
इस मामले में AIPL अंबुजा हाउसिंग एंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर गिरिराज दामानी को भी पक्षकार बनाया गया था।
उन्होंने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के साथ उनका कोई सीधा समझौता नहीं था और न ही उन्होंने उससे भुगतान प्राप्त किया था। आयोग ने इस दलील को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ शिकायत खारिज कर दी।
30 दिन में रकम और ब्याज लौटाने का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दोनों निदेशकों को शिकायतकर्ता की जमा राशि लौटाने का निर्देश दिया है। आदेश के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- रिफंड राशि: ₹32,05,634
- ब्याज: संबंधित भुगतान की तारीखों से रिफंड तक 12% सालाना
- अतिरिक्त खर्च: ₹50,000 संयुक्त रूप से
- आदेश पालन की समयसीमा: आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर
आयोग की अध्यक्षता संजीव बत्रा ने की, जबकि मोनिका भगत सदस्य के रूप में शामिल थीं। यह फैसला उन फ्लैट खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें निर्धारित समय में संपत्ति का कब्जा नहीं मिलता और वे अपने भुगतान की वापसी के लिए उपभोक्ता आयोग का सहारा लेते हैं।

